शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को मतदाताओं के लिए और सरल बनाते हुए चुनाव आयोग ने बड़ा निर्णय लिया है।
वर्ष 2003 की मतदाता सूची में रिकॉर्ड न मिलने वाले 1.04 करोड़ मतदाताओं को अब नोटिस जारी किया जाएगा। इन मतदाताओं को राहत देने के लिए आयोग ने बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) को ‘बीएलओ एप’ के माध्यम से मतदाताओं के प्रमाण पत्र अपलोड करने का अधिकार दे दिया है, जिससे उन्हें कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
एसआईआर के दौरान प्रदेश में करीब 1.04 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल सके हैं। ऐसे मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग अब इन्हें नोटिस जारी करने जा रहा है। यह नोटिस बीएलओ मतदाताओं के घर जाकर सौंपेंगे। नोटिस मिलने के बाद मतदाता को आयोग द्वारा निर्धारित 13 अभिलेखों की सूची में से किसी एक प्रमाण पत्र को उपलब्ध कराना होगा।
नोटिस के समय ही यदि बीएलओ को आप प्रमाण पत्र उपलब्ध करा देंगे और बीएलओ उसे एप पर तत्काल अपलोड कर देंगे तो मतदाताओं की दौड़ बच जाएगी। इसके बाद मतदाताओं को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी।
चुनाव आयोग ने अब नोटिस जारी करने और सुनवाई की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए बड़ी तैयारी की है। करीब 10 हजार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रदेश में 403 विधान सभा क्षेत्र हैं, सभी में एक-एक ईआरओ पहले से लगे हुए हैं।
इनके साथ ही लगभग 2,000 सहायक ईआरओ और 7,000 अतिरिक्त एईआरओ की तैनाती की गई है। सुनवाई के लिए सभी तहसील, ब्लाक, नगर पालिका, नगर पंचायत व नगर निगमों में केंद्र बनाए जा रहे हैं। आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता बनने से वंचित न रहे और एसआईआर अभियान के माध्यम से मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और भरोसेमंद बन सके।
प्रदेश में रह रहे बिहार के मतदाताओं को राहत
प्रदेश में रह रहे बिहार के मतदाताओं के लिए एसआईआर के दौरान बड़ी राहत की व्यवस्था की गई है। यदि किसी मतदाता का नाम बिहार के एसआईआर के बाद बनी मतदाता सूची में दर्ज है, तो उसे प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाताओं को राहत मिलेगी और उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज जुटाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
चुनाव आयोग ने यह अभिलेख किए हैं मान्य
- केंद्र, राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों या पेंशनभोगियों को जारी पहचान पत्र
- एक जुलाई 1987 से पहले सरकार/स्थानीय प्राधिकरणों/बैंकों/डाकघर/एलआइसी/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र/प्रमाणपत्र/अभिलेख
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालयों द्वारा जारी हाईस्कूल/शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाण पत्र
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां भी हो)
- राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर
- सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि/मकान आवंटन प्रमाण पत्र
- आधार के साथ कोई भी एक प्रमाण पत्र और लगाना होगा
- बिहार एसआईआर की मतदाता सूची
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