राजनगर एक्सटेंशन का दृश्य। जागरण आर्काइव
लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। शहर की कई आवासीय सोसायटियों में लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) में निर्धारित क्षमता के अनुरूप नहीं हैं। आरोप है कि ये एसटीपी न तो उत्पन्न हो रहे सीवेज वाटर को पूरी तरह ट्रीट कर पा रहे हैं और न ही पर्यावरणीय मानकों पर खरे उतरते हैं। शहर की राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक और एनएच-9 क्षेत्र की कई सोसायटियों में क्षमता के प्रतिकूल एसटीपी स्थापित होने के आरोप लगाए गए हैं।
इसी के तहत बिल्डरों को सोसायटी के कुल क्षेत्रफल और फ्लैटों की संख्या के आधार पर पर्याप्त क्षमता का एसटीपी लगाना अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद कई परियोजनाओं में कम क्षमता के एसटीपी लगाए जाने का दावा किया गया है। सोसायटियों की अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) का आरोप है कि संबंधित विभागों की मिलीभगत से बिल्डरों ने नियमों को दरकिनार किया।
केस स्टडी-
500 केएलडी की जगह 70 केएलडी का एसटीपी
गौर कैस्केड्स एओए के सचिव पुनीत गोयल का कहना है कि सोसायटी में 500 केएलडी क्षमता का एसटीपी लगाया जाना था, लेकिन मौके पर मात्र 70 केएलडी क्षमता का छोटा एसटीपी लगाया गया है। यह प्लांट सोसायटी में उत्पन्न होने वाले सीवेज को ट्रीट करने में पूरी तरह असमर्थ है। इस मामले में एओए की ओर से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
आदित्य वर्ल्ड सिटी में भी नाकाफी क्षमता का आरोप
आदित्य वर्ल्ड सिटी सेक्टर-एक, दो, तीन और चार के एओए अध्यक्ष डा. शिव कुमार ने आरोप लगाया कि टाउनशिप की अनुमानित जनसंख्या के अनुपात में एसटीपी की क्षमता बेहद कम है। स्वीकृत लेआउट के अनुसार टाउनशिप की अनुमानित जनसंख्या 1,57,095 दर्शाई गई है, लेकिन इसके अनुरूप एसटीपी का निर्माण नहीं हुआ।
सेक्टर-तीन में 3,591.5 वर्ग मीटर भूमि पर एसटीपी प्रस्तावित था, जबकि अब तक केवल 237 वर्ग मीटर क्षेत्र में ही एसटीपी विकसित किया गया है। हालांकि, बिल्डर पक्ष का कहना है कि ईआइए रिपोर्ट में टाउनशिप की जनसंख्या 57,495 दर्शाई गई है और उसी के अनुसार एसटीपी की स्थापना व संचालन किया जा रहा है। |
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