53वां विश्व पुस्तक मेला 10 जनवरी को भारत मंडपम में शुरू होगा, जिसका उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी पुस्तक प्रदर्शनी, विश्व पुस्तक मेला, 10 जनवरी को भारत मंडपम में शुरू होगा। मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे और यह 18 जनवरी तक चलेगा। यह नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा आयोजित मेले का 53वां संस्करण है। इसके निदेशक युवराज मलिक ने बताया कि पहली बार मेले में एंट्री पूरी तरह से मुफ्त होगी। कतर को गेस्ट ऑफ ऑनर का दर्जा दिया गया है, जबकि स्पेन फोकस कंट्री होगा।
संविधान क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि इस साल की थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और ज्ञान @75“ है, जो भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्र निर्माण में भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता, बलिदान और योगदान को समर्पित है। एक हजार वर्ग मीटर में फैला थीम पवेलियन भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के इतिहास को प्रदर्शित करेगा।
इसमें अर्जुन टैंक, INS विक्रांत और तेजस विमान की प्रतिकृतियां, 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि और प्रमुख सैन्य अभियानों पर आधारित प्रदर्शनियां होंगी। NBT के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर ने कहा कि मुफ्त एंट्री देने का फैसला यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है कि किताबें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचें। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO) मेले का सह-आयोजक है।
35 से ज्यादा देशों के एक हजार से अधिक प्रकाशक लेंगे हिस्सा
रूस, जापान, पोलैंड, फ्रांस, अबू धाबी, ईरान, कजाकिस्तान, हंगरी और चिली सहित 35 से ज़्यादा देशों के एक हज़ार से ज़्यादा प्रकाशक और एक हजार से ज्यादा वक्ता हिस्सा लेंगे। विश्व पुस्तक मेले में बच्चों के लिए एक विशेष किड्स एक्सप्रेस पवेलियन, ई-बुक्स के लिए एक नेशनल ई-लाइब्रेरी, पब्लिशिंग इंडस्ट्री के लिए नई दिल्ली राइट्स टेबल और सांस्कृतिक संध्याएँ भी होंगी।
हॉल नंबर छह में बच्चों का पवेलियन
हॉल नंबर छह में किड्स एक्सप्रेस चिल्ड्रन्स पवेलियन में कहानी सुनाना, थिएटर, क्विज़, कला और शिल्प, वैदिक गणित, पुस्तक डिजाइनिंग वर्कशॉप, बच्चों के लेखकों के साथ बातचीत और एक समर्पित क्रिएटिविटी ज़ोन होगा। नेशनल ई-लाइब्रेरी डिजिटल कियोस्क और QR-बेस्ड डाउनलोड के ज़रिए 6,000 से ज़्यादा मुफ्त ई-बुक्स दिखाएगी, जिससे भाषाओं और क्षेत्रों में पढ़ने के लिए सभी को समान एक्सेस मिलेगा। |