अब ट्रंप के टैरिफ की टेंशन नहीं टेक्सटाइल सेक्टर में होगा क्रंतिकारी बदलाव (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी टैरिफ के बाद हालांकि भारतीय टेक्सटाइल निर्माताओं व निर्यातकों के लिए परेशानी बढ़ी हुई है। नए नए बाजार तलाशने की कवायद चल रही है। लेकिन इसी बीच टेक्सटाइल सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव के लिए 15 राज्यों ने गुरुवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते से भारत को टेक्सटाइल हब बनाने में मदद मिलेगी। 2030 तक टेक्सटाइल सेक्टर में कारोबार व निर्यात को दोगुना करने के उद्देश्य से टेक्सटाइल मंत्रालय ने गुवाहाटी में सभी राज्यों के टेक्सटाइल मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक बुलाई है।
टेक्सटाइल मंत्रालय ने क्या बताया?
टेक्सटाइल मंत्रालय के मुताबिक मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्र व राज्य सरकार के बीच टेक्सटाइल संबंधित अनुसंधान, मूल्यांकन, निगरानी, योजना और स्टार्ट-अप (टेक्स-आरएएमपीएस) को बढ़ावा देने पर चर्चा व समझौते किए जाएंगे।
केंद्र सरकार की यह योजना टेक्सटाइल संबंधी उत्पादों और अनुसंधान की व्यापकता, गुणवत्ता, प्रतिबद्धता और विश्वसनीयता में सुधार लाने के लिए बनाई गई है। इस योजना पर 15 राज्यों ने एक-दूसरे को आपस में सहयोग करने व इस पर अमल के लिए अपनी रजामंदी जाहिर की।
टेक्सटाइल सेक्टर में काटन, यार्न, फैबरिक व गारमेंट की चेन शामिल है।इन संरचनात्मक सुधारों में सहयोग देने के लिए टेक्सटाइल मंत्रालय प्रत्येक राज्य व केंद्र शासित प्रदेश को प्रतिवर्ष 12 लाख रुपये का वित्तीय अनुदान प्रदान करेगा।
समझौते से क्या होगा फायदा?
मंत्रालय का मानना है कि उद्योग की मूल शक्ति उसके क्षेत्रीय समूहों में निहित है, इसलिए योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। प्रत्येक जिले के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा जिसका वितरण विशिष्ट जिला कार्य योजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के आधार पर किया जाएगा।
इस समझौते के माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टेक्सटाइल संबंधी डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत परिचालन ढांचा तैयार किया गया है। टेक्स-आरएएमपीएस योजना के तहत, यह पहल क्लस्टर और जिला स्तर पर सीधे प्रयास केंद्रित करके हथकरघा, हस्तशिल्प, परिधान, तकनीकी वस्त्र आदि सहित प्रमुख क्षेत्रों के लिए एकीकृत योजना को बढ़ावा देती है।
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