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VB-GRAMG कानून की वापसी के लिए कांग्रेस का आंदोलन, सभी राज्यों में पार्टी की बैठक तेज

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VB-GRAMG कानून की वापसी के लिए कांग्रेस का आंदोलन (फाइल फोटो)



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वीबी जीरामजी कानून की वापसी के लिए मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू करने जा रही कांग्रेस के इस आंदोलन की सफलता का पूरा दारोमदार राज्य इकाईयों पर है। इसीलिए पार्टी नेतृत्व ने 10 जनवरी से 25 फरवरी तक होने वाले मनरेगा बचाओ संग्राम के दौरान प्रदेश इकाईयों की सक्रियता की जवाबदेही कांग्रेस महासचिवों और राज्यों के प्रभारियों पर सौंपी है।

इसके मद्देनजर ही पार्टी ने सभी राज्यों में पार्टी इकाईयों की मनरेगा बचाओ संग्राम के लिए गुरूवार को हुई तैयारी बैठक में एआइसीसी प्रभारियों तथा महासचिवों को अनिवार्य रूप से भेजा। जीबी जीरामजी के खिलाफ आंदोलन के जरिए जाहिर तौर पर कांग्रेस राज्यों में अपनी संगठनात्मक क्षमता को भी परखना चाहती है।
कांग्रेस को उठाना पड़ा खामियाजा

लंबे अर्से से पार्टी तमाम राज्यों में संगठन की कमजोरियों से रूबरू होती रही है और कांग्रेस को चुनावों में भी इसका खामियाजा उठाना पड़ा है।पिछले साल अप्रैल में अहमदाबाद में हुए कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पार्टी ने एक साल तक संगठन सृजन वर्ष घोषित करते हुए बूथ, ब्लॉक, जिला और राज्य से लेकर शीर्ष स्तर तक संगठन को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

इस पहल के पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान आदि राज्यों में जिला अध्यक्षों की पार्टी द्वारा तय की गई नई प्रणाली के जरिए नियुक्ति हुई। स्वाभाविक रूप से मनरेगा बचाओ संग्राम कांग्रेस के लिए इन राज्य इकाईयों के जुझारूपन क्षमता को परखने का मौका देगा।

हालांकि अभी बहुत से राज्यों में संगठन सृजन अभियान का काम बाकी है। वहीं ब्लॉक और बूथ लेवल पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की तस्वीर अभी तक सामने नजर नहीं आयी है। संगठनात्मक ढांचे की इन चुनौतियों के मद्देनजर ही संभवत: कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम का फोकस राज्यों के साथ जिला और ब्लॉक स्तर पर रखने की रणनीति बनाई है।

वीबी जीरामजी कानून को वापस लेकर मनरेगा को बहाल करने के अपने आंदोलन की राज्यों में हो रही तैयारियों के बीच गुरूवार को कांग्रेस ने मोदी सरकार पर काम का अधिकार छीनने का आरोप लगाया। पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर दोनों कानूनों में अंतर बताते हुए कहा कि मनरेगा ने हर परिवार को न्यूतनम 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी दिलाई थी जबकि नए कानून में काम की कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी।
कांग्रेस ने क्या दावा किया?

कांग्रेस ने यह दावा भी किया कि मनरेगा में हर गांव में काम की गारंटी थी मगर जीबी जीरामजी में केंद्र सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही काम मिलेगा। छत्तीसगढ के प्रभारी कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने रायपुर में मनरेगा बचाओ संग्राम की तैयारी बैठक के उपरांत एक्स पोस्ट में कहा भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस योजना से न केवल महात्मा गांधी जी का नाम हटाया बल्कि कई नियम भी बदल दिए हैं जिससे यह योजना कमजोर हो गई है।इससे योजना के प्रभाव को लेकर भी गंभीर संकट पैदा हो गया है और इसलिए कांग्रेस इन बदलावों के खिलाफ मजबूत आवाज उठाने की पहल कर रही है।

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