158 सालों से ग्रीनलैंड लेने की कोशिश कर रहा अमेरिका।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की डेनमार्क से ग्रीनलैंड को खरीदने में फिर से दिलचस्पी, अमेरिकी इतिहास के एक लंबे पैटर्न में फिट बैठती है। अमेरिकी गृहयुद्ध के बाद हुई शांत बातचीत से लेकर दूसरे विश्व युद्ध के बाद 100 मिलियन डॉलर के ऑफर तक, अमेरिकी नेताओं ने बार-बार ग्रीनलैंड को एक रणनीतिक का हिस्सा माना है।
अमेरिका पिछले 158 सालों में कम से कम तीन बार कोशिश कर चुका है कि ग्रीनलैंड उसके पास आ जाए। आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी।
1867–1868: अलास्का खरीदने के बाद अमेरिका की शुरुआती दिलचस्पी
जब अमेरिका ने रूस से अलास्का खरीदा तो विदेश मंत्री विलियम सेवर्ड के तहत अधिकारियों ने आर्कटिक में अपने विस्तार की बड़ी योजना के तहत ग्रीनलैंड को हासिल करने पर चर्चा की। सेवार्ड ने बताया कि यह इलाका कोयले सहित प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर था। लेकिन यह विचार कभी औपचारिक प्रस्ताव तक नहीं पहुंचा, क्योंकि कांग्रेस को आर्कटिक में एक और अधिग्रहण करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी।
1910: ग्रीनलैंड से जुड़ी जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट के समय ग्रीनलैंड को अमेरिका में फिर से मिलाने की कोशिश की गई। अमेरिकी डिप्लोमैट्स ने एक जमीन-बदली की योजना पेश की थी, जिसके तहत ग्रीनलैंड को कहीं और रियायतों के बदले अमेरिका को ट्रांसफर कर दिया जाता। डेनमार्क ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और यह योजना जल्दी ही खत्म हो गई।
1946: दूसरे विश्व युद्ध के बाद औपचारिक खरीद का प्रस्ताव
कोल्ड वॉर की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के प्रशासन ने ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए डेनमार्क को औपचारिक रूप से 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर सोने के रूप में देने की पेशकश की थी और इसकी रणनीतिक अहमियत बताई थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस द्वीप पर अमेरिका द्वारा बनाया गया एक एयरफील्ड यूरोप जाने वाले मिलिट्री प्लेन के लिए एक बड़ा रीफ्यूलिंग पॉइंट था।
डेनमार्क ने ट्रूमैन के ऑफर को ठुकरा दिया। हालांकि अमेरिका के पास मिलिट्री एक्सेस बना रहा। यह मौजूदगी आज भी दूरदराज के पिटुफिक स्पेस बेस पर बनी हुई है, जो अमेरिकी रक्षा विभाग का सबसे उत्तरी इंस्टॉलेशन है।
ग्रीनलैंड लेने की जिद पर क्यों अड़ा है अमेरिका?
ग्रीनलैंड की लोकेशन अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अटलांटिक महासागर और आर्कटिक को जोड़ता है। यहां पर अमेरिकी सैन्य अड्डा है, जो मिसाइल रक्षा में माहिर है। ग्रीनलैंड आर्कटिक सर्कल में स्थित है, जहां महाशक्तियां सैन्य और वाणिज्यिक प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
ग्रीनलैंड में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का विशाल भंडार है, जो एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण हैं। चीन इस बाजार पर हावी है, लेकिन अमेरिका आगे निकलना चाहता है। ग्रीनलैंड के महाद्वीपीय शेल्फ में आर्कटिक में सबसे बड़े न निकाले गए तेल और गैस भंडार हो सकते हैं। डेनमार्क सरकार ने पर्यावरणीय जोखिमों को देखते हुए यहां तेल या गैस नहीं निकाला, लेकिन अमेरिका की इसमें दिलचस्पी हो सकती है।
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