वेनेजुएला के तेल से दुनिया पर पड़ेगा प्रभाव
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को उन्हीं के घर से गिरफ्तार कर लिया और अपने साथ अमेरिका ले गए। अब मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना दावा कर रहे हैं।
अमेरिका के इस दावे ने एक बड़ी चिंता का विषय खड़ा कर दिया है। वेनेजुएला में जमीन के नीचे 300 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार होने का अनुमान है। अगर वेनेजुएला के सारे तेल को निकाल लिया जाता है, तब जलवायु परिवर्तन पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
वेनेजुएला के पास तेल का भंडार
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल का भंडार होने का अनुमान है। वहीं डोनल्ड ट्रंप इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं। ट्रंप ने पहले ही अमेरिकी तेल कंपनियों को इस काले सोने (तेल) को निकालने के लिए अरबों डॉलर के निवेश की योजना बना ली है।
वेनेजुएला में पाया जाने वाला ज्यादातर तेल ओरिनोको बेल्ट में मिलता है, जो कि देश के पूर्वी हिस्से में है। इस भू-भाग में पाए जाने वाले तेल को भारी खट्टा कच्चा कहा जाता है। ये तेल कनाडा में पाए जाने वाले तेल की धूल के समान है। वेनेजुएला में पाया जाने वाला तेल गुड़ की तरह गाढ़ा और चिपचिपा होता है। इस तेल के गाढ़े होने की वजह है कि इसमें हल्के तेल की तुलना में पृथ्वी को गर्म करने वाले कार्बन की सांद्रता ज्यादा होती है।
वेनेजुएला के तेल को रिफाइन करना मुश्किल
वेनेजुएला में पाए जाने वाले भारी तेल की रिफाइनिंग गाढ़ेपन के कारण आमतौर पर कठिन और अधिक ऊर्जा खपत वाली होती है। पर्यावरण गैर-लाभकारी संस्था ऑयल चेंज इंटरनेशनल के अनुसंधान सह-निदेशक लॉर्न स्टॉकमेन ने कहा, \“तेल कुएं से लिक्विड फॉर्म में नहीं निकलता। इसके लिए जलाशय में भाप पंप करके तेल के पिघलाया जाता है और तब कुएं से निकाला जाता है।\“
वेनेजुएला में कुएं से तेल निकालने के बाद इसे गैसोलीन और डीजल जैसे उपयोगी उत्पादों के तौर पर प्रयोग में लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ ही इसे रिफाइन करने की प्रक्रिया महंगी भी होती है। वेनेजुएला में मौजूद संसाधनों के जरिए इसे रिफाइन करने से जलवायु प्रदूषण और भी बढ़ जाता है।
कार्बन ट्रैकर के ऊर्जा आपूर्ति अनुसंधान प्रमुख गाय प्रिंस ने कहा, \“वेनेजुएला के तेल का भौतिकी और बुनियादी ढांचा ऐसा है कि इसे गंदा तेल माना जाता है। वेनेजुएला में बुनियादी ढांचा पुराना और खराब रखरखाव वाला है, जिससे मीथेन रिसाव, ज्वलन और फैलाव का खतरा बढ़ जाता है।\“
अमेरिका के पास आधुनिक तकनीक
वेनेजुएला के तेल में मीथेन एक बड़ी जलवायु समस्या है क्योंकि यह पृथ्वी को गर्म करने वाली गैस है। यह कार्बन डाइऑक्साइड से 80 गुना अधिक शक्तिशाली होती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, वेनेजुएला में तेल और गैस संचालन की मीथेन तीव्रता, वैश्विक औसत की तुलना में छह गुना ज्यादा है। इसका एक कारण देश में ज्वलन का उच्च स्तर है। यह एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें अतिरिक्त प्राकृतिक गैस को जलाने से बड़ी मात्रा में मीथेन निकलती है।
कंसल्टिंग फर्म रायस्टैड एनर्जी के उत्सर्जन अनुसंधान प्रमुख पैट्रिक किंग के मुताबिक, आज के समय में वेनेजुएला में उत्पादित तेल के प्रत्येक बैरल से जलवायु प्रदूषण वैश्विक औसत की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो गया है।
अमेरिका, जो कि वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना हक होने की बात कह रहा है, अगर वो इस तेल को रिफाइन करता है, तब जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है। रायस्टैड के किंग ने कहा कि अमेरिका ने अपनी कुछ वैश्विक तेल परियोजनाओं में उत्सर्जन की तीव्रता को कम करने में सफलता हासिल की है।
रायस्टैड के किंग ने आगे कहा कि वेनेजुएला के तेल की रिफाइनिंग के लिए अभी भी भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। वहीं तेल उत्सर्जन को कम करने के लिए अमेरिका को यह प्रक्रिया काफी महंगी भी पड़ सकती है।
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