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कहने को देवरिया में मेडिकल कॉलेज, रेफर कर दिए जाते हैं कराहते रोगी

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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज। जागरण  



जागरण संवाददाता, देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हुए चार वर्ष हो गए, लेकिन यहां डाक्टरोंं की कमी दूर नहीं हो सकी है। हाल यह है कि कई ऐसे रोग हैं जिसके उपचार के लिए एक भी विशेषज्ञ डाक्टर की तैनाती नहीं है। जिसमें हृदय रोग व नस रोग के एक भी विशेषज्ञ डाक्टरोंं की तैनाती नहीं है।  

कहने को तो यह मेडिकल कालेज है, लेकिन समुचित उपचार के अभाव में रोगी कराहते रहते हैं और यहां से रेफर कर दिए जाते हैं। जबकि इन दोनों रोगों के रोगी प्रतिदिन बड़ी संख्या में मेडिकल कालेज उपचार के लिए आते हैं। इन दोनों बीमारियों के गंभीर रोगियों को मेडिकल कालेज से बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर रेफर करना पड़ता है।  

आइसीयू व इको आदि की भी व्यवस्था नहीं है। मंगलवार की रात पूर्व आइपीएस अमिताभ ठाकुर को भी विशेषज्ञ चिकित्सक व आइसीयू के अभाव में ही बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर रेफर किया गया।

मेडिकल कालेज में एमबीबीएस चौथे वर्ष की पढ़ाई चल रही है। मेडिकल कालेज में एनाटामी, फिजियोलाजी, बायो केमेस्ट्री, आर्थो, नेत्र, नाक कान गला रोग, मेडिसिन विभाग, चर्म रोग, सर्जरी, कम्युनिटी मेडिसिन समेत कुल 22 विभाग कार्यरत हैं। इन विभागों में भी डाक्टरों की कमी है। मांग के अनुरूप आधा से भी कम डाक्टर प्रत्येक विभाग में हैं।  

विभागों में उपलब्ध डाक्टरोंं से जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। सबसे अधिक हृदय रोग विशेषज्ञ व नस रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता है। कारण ठंड के मौसम में नस व हार्ट के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक ठंड के कारण नसें सिकुड़ने और ब्लड गाढ़ा होने के कारण ब्लड सर्कुलेशन वैसे नहीं रहता जैसे सामान्य दिनों में रहता है। ऐसे में हृदय को सामान्य रूप से ब्लड नहीं मिलने या नसों में ब्लाकेज से रोगी की समस्या बढ़ जाती है।  

मेडिकल कालेज में हृदय रोगियों को एमडी मेडिसिन व नस के रोगियों को हड्डी रोग विशेषज्ञ विकल्प डाक्टर के रूप में उपचार करते हैं। आराम नहीं मिलने पर रोगियों को बीआरडी मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता है।

मेडिकल कालेज में आइसीयू की सुविधा नहीं

मेडिकल कालेज में चार वर्ष बाद भी आइसीयू की सुविधा शुरू नहीं की जा सकी है। जिससे गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। बच्चों के लिए पीआइसीयू व एसएनसीयू वार्ड है लेकिन बालिग रोगियों के लिए आइसीयू वार्ड आज तक नहीं बनाया जा सका है। यह अपने आप में सवाल है। मेडिकल कालेज में डायलिसिस की सुविधा है लेकिन नेफ्रोलाजिस्ट की तैनाती नहीं है। यहां एमबीबीएस व एमडी मेडिसिन से काम चलाया जा रहा है।

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मेडिकल कालेज से प्रतिदिन रेफर होते हैं आठ से दस रोगी

मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में प्रतिदिन उपचार के लिए आए गंभीर रोगियों में औसतन आठ से दस गंभीर रोगियों को बीआरडी मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है। एक मेडिकल कालेज से दूसरे मेडिकल कालेज रोगियों के रेफर करने का यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। इस पर रोक नहीं लग पा रही है। जिसका खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। गंभीरावस्था में रोगी जीवन व मौत से जूझते हुए बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर तक डेढ़ घंटे का सफर प्रतिदिन तय करने को मजबूर है। कई रोगी यह सफर तय करने में ही जान गंवा देते हैं।


मेडिकल कालेज में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। हालांकि 22 विभागों में एमबीबीएस के छात्रों की पढ़ाई के लिए डाक्टर उपलब्ध हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। समय-समय पर शासन में इसके लिए पत्र लिखा जाता है। मेडिकल कालेज परिसर में क्रिटिकल केयर यूनिट में 50 बेड का आइसीयू वार्ड इस वर्ष में साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। उसके संचालन के बाद काफी हद तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी।  
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-डा. रजनी पटेल, प्रधानाचार्य
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