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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। स्मार्ट प्रीपेड मीटर में तकनीकी खामियां मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (डिस्काम) के दायरे में आने वाले बिजली उपभोक्ताओं के एक लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज कराए जाने के बाद भी शून्य बैलेंस दिखाते पाए गए हैं।
ऐसे में बिजली गुल होने पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाते हुए पावर कारपोरेशन प्रबंधन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की पिछले दिनों समीक्षा बैठक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के रिचार्ज के बाद भी बैलेंस शून्य दिखाए जाने की बात सामने आने पर उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि एक लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर में चार्ज कैलकुलेशन (शुल्क गणना) प्रणाली के खराब होना एक तरह से गंभीर मामला है। उपभोक्ताओं के खातों से बैलेंस शून्य या माइनस में होने से साफ है कि सिस्टम में बड़ी खामी है।
वर्मा ने बताया कि यह तथ्य भी सामने आया है कि 11 दिसंबर को साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट (एसएटी) भी कई बार ठप हुआ। इस दौरान बड़े पैमाने पर मीटरों का बैलेंस शून्य हो गया। मीटरों में बैलेंस शून्य होने से सबसे अधिक शामली के उपभोक्ता परेशान हुए।
परिषद अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेशभर से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की दिक्कतों को लेकर उपभोक्ता लगातार शिकायतें कर रहे हैं लेकिन तकनीकी खामियों को छुपाने की कोशिश की जा रही है।
पश्चिमांचल निगम में अब तक 10,82,666 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। प्रदेशभर में 56 हजार से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। प्रदेशभर में 37 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड मोड में बदले गए हैं।
परिषद अध्यक्ष ने मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ ही प्रभावित उपभोक्ताओं को तत्काल राहत दी जाए। |
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