मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड
अंशू दीक्षित, जागरण, लखनऊ : उत्तर प्रदेश बिजली विभाग उपभोक्ताओं को सेल्फ रीडिंग से बिल बनवाने का अवसर तो देता है, लेकिन चंद लोगों की गलतियों के खामियाजा बड़ी संख्या में लोगों को उठाना पड़ता है। बिजली स्टोरेज के कई मामले सामने आने के बाद विभाग योजना ही बदल देता है। एक बार फिर सेल्फ रीडिंग का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन साल में दो बार।
केस एक- गोमती नगर के विकास खंड में एक उपभोक्ता ने बिजली यूनिट खर्च की आठ सौ यूनिट का सेल्फ रीडिंग के तहत सिर्फ 375 यूनिट का बिल बनवाया। काउंटर पर बैठे कर्मी ने ट्रस्ट रीडिंग यानी सेल्फ रीडिंग के तहत बिल बनाकर दे दिया। यह क्रम कई वर्ष चल रहा था। एक बार बिजली विभाग की टीम घर पहुंच गई। जांच की तो मौके पर पांच हजार यूनिट स्टोर पायी। जुर्माना लगाकर हजारों का बिल वसूला गया। अभियंताओं ने ऐसा करने का कारण पूछा तो उपभोक्ता कोई उचित जवाब नहीं दे सका और माफी मांगने लगा।
केस दो- आशियान में भी सरकारी विभाग में कार्यरत एक होशियार उपभोक्ता ने पांच किलोवाट का कनेक्शन ले रखा था। घर में बिजली की खपत ठीक ठाक थी। करीब दो हजार वर्ग फिट में बने घर को देखकर कोई नहीं कर सकता था कि हर महीना बिजली बिल बारह से पंद्रह सौ रुपये आएगा। जांच की गई तो पता चला कि संबंधित व्यक्ति एक से पांच तारीख के बीच में आते हैं और समय से बिल जमा करके चले जाते हैं। अभियंताओं को शक हुआ, जांच कराई तो साढ़े तीन हजार यूनिट से अधिक की स्टोर रीडिंग मिली। मौके पर जुर्माना लगाकर बिल वसूला गया। ऐसे ही चंद उपभोक्ताओं के कारण सही उपभोक्ताओं को भी अब सेल्फ रीडिंग का लाभ नहीं मिल सकेगा।
साल में सिर्फ दो माह सेल्फ रीडिंग
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने सेल्फ रीडिंग यानी ट्रस्ट रीडिंग की सुविधा अब सिर्फ साल में दो माह देने का निर्णय किया है। अगर साल में लगातार दो बार यह सुविधा का लाभ उठा लिया तो तीसरे माह बिल रीडिंग लेकर नहीं बनवा सकेंगे। बिजली विभाग की इस सख्ती से उन उपभोक्ताओं को कुछ समय के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है, जिनके यहां मीटर रीडर नियमित रूप से नहीं आते हैं और उपभोक्ता ईमानदारी से मीटर रीडिंग का वीडियो बनाकर बिल जमा करते थे। बिजली विभाग को जहां हर माह कुल खपत का राजस्व मिलेगा। वहीं उपभोक्ताओं के परिसर में मीटर रीडर नियमित रूप से हर माह भेजने पर जोर देना होगा।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (वाणिज्य) योगेश कुमार ने बताया गलत रीडिंग के मामले बढ़ने पर यह निर्णय किया गया है। उन्होंने बताया कि यह सुविधा पूरी तरह बंद नहीं की गई है। इसको सिर्फ साल में दो माह के लिए कर दिया गया है। दो माह से ज्यादा का सेल्फ रीडिंग का लाभ कोई उपभोक्ता नहीं ले सकता।
स्मार्ट प्री पेड मीटर खत्म करेगा रीडिंग की समस्या
स्मार्ट प्री पेड मीटर रीडिंग की समस्या पूरी तरह से खत्म कर देगा। अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर 2026 तक राजधानी लखनऊ के सभी पंद्रह लाख से अधिक उपभोक्ताओं के परिसर में स्मार्ट प्री पेड मीटर लगा दिए जाएंगे। इसके बाद सेल्फ रीडिंग या फिर मीटर के रीडिंग लेने का काम ही खत्म हो जाएगा। |
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