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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को तीसरे दिन की कार्यवाही भी हंगामे की भेंट चढ़ गई। न प्रश्नकाल हुआ और न विशेष उल्लेख (नियम संख्या 280) के तहत विधायक अपने मुददे उठा सके। दरअसल, भाजपा विधायकों ने नेता विपक्ष आतिशी पर सिख गुरुओं के अपमान का आरोप लगाकर हंगामा किया। विधायक आतिशी की माफी की मांग पर अड़े रहे। इसी के चलते पहले आंधे घंटे और उसके बाद अगले दिन तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
बुधवार को विधानसभा सत्र शुरू होते ही मंत्रियों व भाजपा विधायकों ने आतिशी पर गुरु तेग बहादुर का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आतिशी ने आपत्तिजनक शब्द कहे हैं और इसके लिए उन्हें माफ नहीं किया जा सकता।
हंगामा होने पर कुछ देर के लिए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया। 30 मिनट बाद एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो विधायक वेल में आ गए और हंगामा करने लगे। तब सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आतिशी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं आप विधायक की तरफ से उन्हें बताया गया कि आतिशी गोवा गई हुई हैं। सत्र स्थगित होने के बाद भाजपा विधायकों ने परिसर में प्रदर्शन किया और आतिशी के खिलाफ नारेबाजी की। उधर दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविन्द्र इंद्राज और कपिल मिश्रा ने इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत देकर आतिशी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रवेश वर्मा ने कहा कि मंगलवार को श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के शहादत को लेकर चर्चा की जा रही थी। विपक्ष की नेता आतिशी ने इसमें भाग नहीं लिया और अपशब्द कहे। यह बेहद निंदनीय है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सिरसा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर नियम 270 के अंतर्गत चल रही विशेष चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सदन के भीतर जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह अत्यंत अभद्र, शर्मनाक और संसदीय मर्यादाओं के पूर्णतः विपरीत है।
इसीलिए अध्यक्ष को लिखित रूप में दी गई शिकायत तीन स्पष्ट मांगें रखी गई हैं- आतिशी की सदस्यता तत्काल रद की जाए, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो और अध्यक्ष अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए दंडात्मक कार्रवाई भी करें। |
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