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फाइल फोटो।
जासं, जमशेदपुर । लौहनगरी टाटानगर के रेलवे इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। टाटानगर स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव (मेंटेनेंस) और कोचिंग डिपो के विस्तार की बहुप्रतीक्षित योजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। दक्षिण पूर्व रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी मेगा प्रोजेक्ट का पुनर्निर्धारित प्रस्ताव रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली को भेज दिया है, जो बीते 23 दिसंबर से मंजूरी के लिए लंबित है। कुल 383.79 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर बोर्ड की स्वीकृति मिलते ही चक्रधरपुर मंडल में रेलवे विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
आरटीआइ से सामने आई परियोजना की स्थिति टाटानगर कोचिंग डिपो विस्तार और वंदे भारत मेंटेनेंस यार्ड की मौजूदा स्थिति का खुलासा हाल ही में एक आरटीआइ के जवाब से हुआ है। आरटीआइ कार्यकर्ता शशांक शेखर स्वाइन ने दक्षिण पूर्व रेलवे से इस परियोजना के बजट और प्रगति को लेकर जानकारी मांगी थी। रेलवे की ओर से पांच जनवरी को दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि वंदे भारत ट्रेनों के मेंटेनेंस और कोचिंग डिपो के रीलोकेशन के लिए तैयार विस्तृत एस्टीमेट को तकनीकी जरूरतों के अनुसार रीकास्ट किया गया है। रेलवे ने बताया कि पहले जिस परियोजना की लागत करीब 400 करोड़ रुपये आंकी जा रही थी, उसे संशोधित कर अब 383.79 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। यह प्रस्ताव सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताओं के बाद 23 दिसंबर को रेलवे बोर्ड को भेजा गया है।
कई वर्षों से अटका था प्रोजेक्ट
गौरतलब है कि टाटानगर में वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेंटेनेंस यार्ड बनाने की चर्चा पिछले दो-तीन वर्षों से चल रही थी, लेकिन तकनीकी और स्थान संबंधी समस्याओं के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा था। टाटानगर स्टेशन को विश्वस्तरीय स्वरूप देने और वंदे भारत ट्रेनों का हब बनाने के लिए बर्मामाइंस की ओर दूसरे प्रवेश द्वार और वाशिंग लाइन के विस्तार की योजना भी बनी थी।
हालांकि, जगह की कमी और पुराने कोचिंग डिपो की मौजूदगी के कारण योजना बार-बार अटकती रही। इन बाधाओं को दूर करने के लिए रेलवे ने पुराने डिपो को स्थानांतरित कर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नया कोचिंग डिपो और मेंटेनेंस यार्ड विकसित करने का निर्णय लिया, जिससे एस्टीमेट को दोबारा तैयार करना पड़ा।
दक्षिण पूर्व रेलवे का बड़ा केंद्र बनेगा टाटानगर
रेलवे सूत्रों के अनुसार, यदि प्रस्ताव को इसी वित्तीय वर्ष में मंजूरी मिल जाती है, तो जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। परियोजना के पूरा होने के बाद टाटानगर में ही वंदे भारत ट्रेनों की सफाई, मरम्मत और तकनीकी रखरखाव की सुविधा उपलब्ध होगी। फिलहाल, पर्याप्त मेंटेनेंस सुविधा के अभाव में टाटानगर से नई वंदे भारत ट्रेनों के परिचालन को लेकर रेलवे को सीमाएं झेलनी पड़ रही हैं। यार्ड के निर्माण से टाटानगर से पटना, वाराणसी और पुरी जैसे प्रमुख रूटों पर वंदे भारत ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ होगा। साथ ही, मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन और समयबद्धता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
रेलवे के इस मेगा प्रोजेक्ट से न सिर्फ टाटानगर स्टेशन का कद बढ़ेगा, बल्कि पूरे कोल्हान क्षेत्र को रेल नेटवर्क के लिहाज से बड़ी सौगात मिलने की संभावना है। |
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