खासमहल सदर अस्पताल में जांच रिपोर्ट देखते सिविल सर्जन डा. साहिर पाल।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । शहर में आयोजित निश्शुल्क हृदय जांच शिविर के दौरान एक गंभीर और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। जांच के लिए लाए गए 49 बच्चों में से 10 बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी की पुष्टि हुई है।
एक ही शिविर में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के हृदय रोगी पाए जाने से स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सक और अभिभावक सभी सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच नहीं होती तो इन बच्चों की स्थिति जानलेवा भी हो सकती थी।
दरअसल, सिविल सर्जन कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम के सहयोग से बिष्टुपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में ‘नन्हा सा दिल-जन्मजात हृदय रोग निवारण एवं उपचार कार्यक्रम’ के तहत दो दिवसीय निश्शु्ल्क हृदय जांच शिविर आयोजित किया गया है। शिविर के पहले ही दिन जांच के बाद तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया। जांच में शामिल लगभग हर पांचवां बच्चा किसी न किसी स्तर पर हृदय रोग से पीड़ित पाया गया।
नवजात से 18 वर्ष तक के बच्चों की हुई जांच
इस शिविर में नवजात शिशुओं से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की गहन जांच अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा की गई। जांच के दौरान बच्चों की हृदय संरचना, रक्त प्रवाह और धड़कन की स्थिति का परीक्षण किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार कई मामलों में बीमारी जन्म से ही मौजूद थी, लेकिन लक्षण स्पष्ट नहीं होने के कारण अभिभावकों को इसकी जानकारी नहीं थी।
चार बड़े चिकित्सा केंद्रों में भेजे जाएंगे बच्चे
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिन 10 बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी की पुष्टि हुई है, उन्हें आगे के उपचार और आवश्यकता पड़ने पर शल्य चिकित्सा के लिए कोंडापाका (हैदराबाद), खारघर (नवी मुंबई), रायपुर (छत्तीसगढ़) और पलवल (हरियाणा) स्थित उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाएगा। इन सभी बच्चों का इलाज पूरी तरह निश्शुल्क कराया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।
लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
चिकित्सकों ने बताया कि होंठ या त्वचा का नीला पड़ना, दूध पीते समय अधिक पसीना आना, बार-बार सर्दी या बुखार होना, वजन का ठीक से न बढ़ना, जल्दी थक जाना और सांस फूलना, ये सभी जन्मजात दिल की बीमारी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी मानकर अनदेखा करना बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
समय पर पहचान और इलाज से बच सकती जान : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डा. साहिर पाल ने बताया कि जांच के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि समाज में जन्मजात हृदय रोग के कई मामले छिपे हुए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में किसी भी प्रकार का असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत जांच कराएं। समय पर पहचान और उपचार से बच्चों का जीवन पूरी तरह सामान्य बनाया जा सकता है।
जनकल्याण की दिशा में अहम कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निश्शुल्क जांच शिविर न केवल बीमारी की पहचान में मदद करते हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं। ‘नन्हा सा दिल’ कार्यक्रम को जिले में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम माना जा रहा है। |