राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में सड़कों के रखरखाव में एआई तकनीक का प्रयोग होगा। बुधवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओपीआरएमसी-3 की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके तहत बिहार में 19327 किमी सड़कों के रखरखाव हेतु एआई तकनीक के साथ-साथ और कड़े मानक लागू होंगे।
इतना ही नहीं, राज्य सरकार द्वारा सड़कों की गुणवत्ता और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई नई रूपरेखा पर चर्चा हुई।
ओपीआरएमसी-2 की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने ओपीआरएमसी-3 को पुन: सात वर्षों के लिए लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 100 पैकेजों में कुल 19,327 किलोमीटर सड़कों के रखरखाव का प्रविधान किया गया है।
योजना की औसत लागत सात वर्षों के लिए 1.22 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है। इससे पहले के चरण में 72 पैकेजों के तहत 13,064 किलोमीटर सड़कों का संधारण किया जा रहा था, जिसकी तुलना में इस बार दायरा काफी बढ़ाया गया है।
नई योजना के अंतर्गत छह मीटर तक के पुल-पुलियों का पूर्ण संधारण एवं प्रबंधन किया जाएगा, जबकि छह मीटर से अधिक लंबे पुलों के मामले में केवल एप्रोच रोड के क्रस्ट और शोल्डर का रखरखाव होगा। जल निकासी के लिए नाले निर्माण को सड़क की कुल लंबाई के एक प्रतिशत तक सीमित रखा गया है।
सड़कों की खामियों के सर्वेक्षण में एआइ और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और संवेदकों का रिस्पांस टाइम तेज होगा। आपात स्थिति, वीवीआइपी मूवमेंट और प्राकृतिक आपदा के लिए प्रोविजनल राशि को निविदा से अलग रखा गया है।
लापरवाही बरतने वाले संवेदकों पर डीबार और ब्लैकलिस्टिंग के सख्त प्रावधान होंगे। बैठक में पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री पंकज पाल तथा वित्त विभाग की सचिव (व्यय) श्रीमती रचना पाटिल भी उपस्थित रहीं। |
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