जागरण संवाददाता, मेरठ। कड़ाके की सर्दी व कोहरे के चलते स्कूली बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं। ऐसे में बच्चों के सोने व सुबह उठने का रूटीन भी अब बदल गया है।स्कूल जाने की चिंता न होने के कारण बच्चे भी अब आराम से उठ रहे हैं। प्रतिदिन मम्मी से नए व्यंजन की मांग भी कर रहे हैं। बच्चों की पसंद उनकी मम्मियों के लिए भी चुनौती बनी हुई है।
जनवरी का पहला सप्ताह बच्चों की छुट्टियों में ही निकल गया है। सर्दी भरे मौसम में इन छुट्टियों के चलते सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाने वाले बच्चे प्रतिदिन आराम से उठ रहे हैं। नए-नए व्यंजन की मांग भी कर रहे हैं। यही नहीं मनपसंद व्यंजन के साथ बच्चे घर में रहकर मोबाइल फोन चला रहे हैं। उस पर कार्टून और टीवी पर सीरियल देखने की जिद कर रहे हैं।
स्कूल की ओर से दिया होमवर्क व आनलाइन क्लास से पहले वे इन छुट्टियों में पहले अपनी फरमाइश पूरी करा रहे हैं। प्रतिदिन नई-नई मांग के बीच मम्मियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। फिर भी मम्मी बच्चों के साथ प्यारा और मजबूत बंधन होने के चलते उनकी सभी फरमाइश पूरी कर रही हैं।
मोहनपुरी निवासी गृहणी करुणा शर्मा बताती हैं कि बेटा अभिवीरा शर्मा दीवान पब्लिक स्कूल वेस्ट एंड रोड में कक्षा चार का छात्र है। जब से छुट्टी हुई है तब से रोज फास्ट फूड व घर के बने व्यंजनों की मांग करता है। इनमें रसगुल्ला, पिज्जा, सैंडविच व अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
मयूर विहार शास्त्रीनगर निवासी भावना कौशिक बताती हैं कि ओनिर कौशिक सेंट मेरीज एकेडमी में यूके में पढ़ते हैं। भैया की बिटिया अनाया साेफिया गर्ल्स स्कूल में पढ़ती हैं। भावना का कहना है कि स्कूल के दिनों में दोनों बच्चे जल्दी उठ जाते थे, लेकिन अब छुट्टियों में देर से उठ रहे हैं। यह दोनों घुमाने की फरमाइश करते हैं, लेकिन कड़ाके की सर्दी में कहीं लेकर जाना इनके स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है।
कोणार्क कालोनी निवासी दीपाली गुप्ता का बेटा वेदांत सेंट मेरीज एकेडमी व बेटी वेदिका गुप्ता सोफिया गर्ल्स स्कूल में पढ़ते हैं। उनका कहना है दोनों नए-नए व्यंजन की मांग करते हैं। संतुलन बनाने में मुश्किल तब आती है जब दोनों की डिमांड अलग-अलग होती है।
आनलाइन क्लास करने से पहले फरमाइश पूरी कीजिए
सर्दियों की छुट्टियों में कई स्कूल बच्चों के लिए आनलाइन क्लास भी करा रहे हैं। ऐसे में बच्चे मम्मी-पापा से पहले फास्ट फूड एवं घर पर बने व्यंजनों की फरमाइश पूरी करने के लिए कहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे काफी छोटे हैं, ऐसे में उन्हें निराश नहीं किया जा सकता।इसलिए उनकी रोजाना की फरमाइश को पूरा कर रहे हैं।
छुट्टियों में भी छोटे बच्चों के साथ परिवार में संतुलन बनाकर रखना जरूरी है। वरना जल्दी छुट्टियां खत्म होने पर फिर परेशानी आएगी।ऐसे में सुबह ज्यादा देर से उठने की आदत न डालें। मोबाइल पर कार्टून व टीवी पर सीरियल देखने का समय भी तय करें।उनको डांस अथवा मनपसंद किसी गतिविधि का हिस्सा बनाएं। फास्ट फूड से थोड़ा दूरी बनाएं, घर ही बने व्यंजन दें ताकि उनका स्वास्थ्य सही रहे। -डा. मनीषा तेवतिया, प्रवक्ता मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र मेरठ।
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