79 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका राज मरजारा।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। अमरता केवल युद्धभूमि में शहादत से ही नहीं मिलती, बल्कि समाज के लिए किए महान कार्य भी व्यक्ति को अमर बना देते हैं। इस कथन को साकार कर दिखाया सोलन निवासी 79 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका राज मरजारा ने।
उन्होंने 38 वर्ष तक शिक्षा सेवा की और निधन के पश्चात उन्होंने नेत्रदान कर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी दी, वहीं अपनी देह मेडिकल अनुसंधान के लिए पीजीआई चंडीगढ़ को दान कर मानवता की अनुपम मिसाल पेश की।
5 जनवरी की शाम अल्केमिस्ट अस्पताल में राज मरजारा का निधन हो गया। सेक्टर-21 निवासी राज मरजारा की बेटी मोनिका वशिष्ठ ने मां की अंतिम इच्छा के अनुरूप नेत्रदान व देहदान करने के लिए समाजसेवी संस्था हितैषी फाउंडेशन से संपर्क किया।
इसके बाद राज मरजारा की दोनों आंखें पीजीआई चंडीगढ़ की टीम को सौंपी गईं, जिससे दो नेत्रहीनों को दृष्टि मिल सकेगी। इसके अगले दिन पीजीआई के एनाटाॅमी विभाग की प्रमुख डाॅ. अंजली अग्रवाल के नेतृत्व में टीम अस्पताल पहुंची और राज मरजारा का पार्थिव शरीर मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए प्राप्त किया गया।
पति बोले-पत्नी के समाज के प्रति समर्पण पर गर्व
इस अवसर पर राज मरजारा के पति प्रिंसिपल सत्यपाल ने कहा कि उन्हें अपनी पत्नी के समाज के प्रति समर्पण पर गर्व है। नेत्रदान से जहां दो लोगों का जीवन रोशन हुआ, वहीं देहदान से मेडिकल छात्र शिक्षा प्राप्त कर भविष्य में समाज की सेवा करेंगे।
बेटे हिरदेश ने बताया कि उनकी माता ने जीवनकाल में ही स्पष्ट निर्देश दे दिए थे कि मृत्यु के बाद उनके शरीर पर केवल मानवता का अधिकार होगा और नेत्रदान व देहदान अवश्य किया जाए।
आकाश ने बताया कि उनकी माता ने हिमाचल प्रदेश में लगभग 38 वर्षों तक एक आदर्श शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं। वे मृदुभाषी, सरल और हंसमुख स्वभाव की थीं। |
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