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उर्वरक कालाबाजारी पर सख्त सरकार, किसानों के हक पर डाका डालने वालों पर चलेगा कानून का डंडा

deltin33 2026-1-7 08:26:30 views 952
  

किसानों के हक पर डाका डालने वालों पर चलेगा कानून का डंडा



जागरण संवाददाता, पटना। राज्य में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट किया है कि बिहार के किसी भी जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। राज्य में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो भी किसान के हक पर डाका डालेगा, उस पर कानून का डंडा चलेगा।

मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य के गोदामों में 2.16 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.40 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.21 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.35 लाख मीट्रिक टन एमओपी तथा 1.10 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का भंडार मौजूद है। यह भंडार रबी फसलों के लिए पर्याप्त है और किसानों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरकों की कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की शिकायतें मिलने पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई की है। मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक उड़नदस्ता गठित किए गए हैं, जो लगातार छापेमारी और निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कृत्रिम संकट पैदा कर किसानों को गुमराह करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता पड़ने पर सीधे विभाग से संपर्क करें। किसानों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत मिलते ही त्वरित जांच कर कार्रवाई की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को समय पर, निर्बाध और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी न हो।

वहीं कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने बताया कि किसानों से प्राप्त शिकायतों पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। सभी जिलों को प्रखंडवार उर्वरक उप-आवंटन फसल आच्छादन और वास्तविक आवश्यकता के अनुसार करने का निर्देश दिया गया है। सरकार की इस सख्ती से साफ है कि किसानों के हितों से किसी भी तरह का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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