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जेएस विश्वविद्यालय की मान्यता रद! सुकेश यादव की गिरफ्तारी के बाद कसने लगा था शिकंजा, बांटीं थीं फर्जी डिग्रियां

deltin33 2026-1-7 07:56:24 views 906
  

जेएस विवि। फाइल



जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। शिकोहाबाद के मैनपुरी रोड स्थित जेएस विश्वविद्यालय पर शासन-प्रशासन का शिकंजा पिछले वर्ष मार्च में फर्जी डिग्री मामले में कुलाधिपति की गिरफ्तारी के साथ ही कसना शुरू हो गया था। राजस्थान में शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा विश्वविद्यालय की फर्जी और बैक डेट से जारी बीपीएड की डिग्रियां लगाई गईं थीं।
राजस्थान में शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती में फर्जी डिग्रियां पकड़े जाने के बाद सुर्खियों में आया

मामला शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा से जुड़ा था। जयपुर एसओजी ने जांच में पाया कि जेएस विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री के मामले में पेपर लीक गैंग के सदस्यों के बीच कुख्यात था। जयपुर के लालरपुरा, गांधी पथ-वेस्ट निवासी दलाल अजय भारद्वाज का विश्वविद्यालय के संचालकों और अधिकारियों से संपर्क था। भर्ती परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों में से 107 ने स्वयं को जेएस विश्वविद्यालय से पास होना दर्शाया था। जबकि उस सत्र के लिए विश्वविद्यालय में बीपीएड की 100 सीटों की ही मान्यता थी।
सभी छात्र राजस्थान के ही थे

खास बात ये भी थी कि सभी छात्र राजस्थान के ही थे। दलाल की गिरफ्तारी होने के बाद कुलाधिपति डॉ. सुकेश यादव को छह मार्च को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। इसके अगले दिन विश्वविद्यालय से कुलसचिव नंदन मिश्रा को पकड़ा गया। दोनों तभी से जयपुर जेल में हैं। इस घटना क्रम के बाद विश्वविद्यालय पूरे देश में सुर्खियों में आ गई।
जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में की थी मान्यता रद करने की संस्तुति, प्रवेश पर लगाई थी रोक


जयपुर एसओजी कई बार जांच के लिए शिकोहाबाद आई। एक बार कुलाधिपति को भी साथ लाई। इधर जिला प्रशासन ने भी जांच पड़ताल शुरू कर दी। डीएम रमेश रंजन ने सीडीओ शत्रोहन वैश्य की अध्यक्षता में कमेटी गठित की। इसी कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने मान्यता रद करने की संस्तुति की थी। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन को मौखिक रूप से प्रवेश न लेने की हिदायत भी दी गई।

कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि विश्वविद्यालय के पास मानक से कम भूमि थी। छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा, परिणाम और जारी की गईं डिग्रियों की जानकारी नियमित रूप से उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को नहीं भेजी जाती थी।

जयपुर एसओजी ने ये लगाए थे आरोप


जयपुर एसओजी के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा बैक डेट में बीपीएड की दर्जनों फर्जी डिग्रियां जारी की गई थीं। चयनित हुए दर्जनों अभ्यर्थियों द्वारा लगाई गई डिग्री फर्जी तरीके से बैक डेट में जारी हुई थीं। एक ही शिक्षा सत्र में प्रवेश लेने वाले सभी अभ्यर्थियों का चयन हो गया। अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन के समय अलग-अलग विश्वविद्यालय का उल्लेख किया गया, लेकिन चयन के बाद जेएस विश्वविद्यालय की डिग्री लगाई गई।

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