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जीडीए ने शुरू की अलोकप्रिय संपत्तियों के चिह्नांकन और दरों के निर्धारण की कार्रवाई। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की लंबे समय से खाली पड़ी और अलोकप्रिय हो चुकी आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियों की कीमत तो घटेगी ही इन्हें आवंटित कराने वालों को एक और बड़ा लाभ होगा। प्राधिकरण की ओर से कीमतों में संशोधन के बाद तय दर का 25 प्रतिशत राशि जमा करने वालों को तत्काल संपत्ति पर कब्जा भी मिल जाएगा। चूंकि ये संपत्ति पहले से बनकर तैयार हैं, इसलिए कब्जा पाने के लिए इंतजार नहीं करना होगा।
शासन से मंजूरी के बाद प्राधिकरण अपनी सभी अलोकप्रिय संपत्तियों का चिह्नांकन और निरीक्षण करा रहा है। साथ ही दरों का भी निर्धारण किया जा रहा है। जीडीए के मुताबिक यदि किसी संपत्ति में मरम्मत या रंग रोगन की जरूरत होगी तो प्राधिकरण पहले उसे पूरा कराएगा, फिर संपत्ति काे आवंटित करेगा। दरों का निर्धारण नई गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है। अगले माह बोर्ड से दरों आदि को लेकर मंजूरी लेने के बाद प्राधिकरण ऐसी संपत्तियों की नए सिरे से बिक्री शुरू करेगा।
रामगढ़ताल क्षेत्र स्थित वसुंधरा आवासीय योजना और लोहिया एन्क्लेव के करीब 30 फ्लैट समेत 100 से अधिक आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियों की दरों में 25 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। सरकार के इस फैसले से जहां वर्षों से घर, दुकान या कार्यालय खरीदने का सपना देख रहे आम लोगों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जीडीए की अटकी हुई बिक्री को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के बिकने से प्राधिकरण की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
जीडीए की कई आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां ऐसी हैं, जिनके निर्माण को एक दशक से भी अधिक समय बीत चुका है। हर साल दरों में वृद्धि और उचित देखरेख के अभाव में ये संपत्तियां धीरे-धीरे पुरानी और क्षतिग्रस्त होती गईं। इसके बावजूद हर साल एक अप्रैल को इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होती रही, जिससे आम खरीदार इनसे दूर होता चला गया।
वर्तमान व्यवस्था के तहत प्राधिकरण आवासीय संपत्तियों की कीमत में हर साल 10 प्रतिशत और व्यावसायिक संपत्तियों में 12 प्रतिशत की वृद्धि करता है। करीब दो साल पहले तक यह वृद्धि और भी अधिक थी। आवासीय संपत्तियों में 15 प्रतिशत और व्यावसायिक में 18 प्रतिशत तक यह वृद्धि होती थी।
इसका नतीजा यह हुआ कि कीमतों में काफी वृद्धि हो गई। वसुंधरा योजना में जिन फ्लैटों की शुरुआती कीमत करीब 50 लाख रुपये थी, वे बढ़कर 70 लाख रुपये से अधिक हो गई। इसी तरह लोहिया एन्क्लेव के फ्लैट भी आम खरीदार की पहुंच से बाहर हो गए।
गोलघर स्थित जीडीए टावर में खाली पड़े कार्यालय ब्लाकों की कीमत सवा करोड़ रुपये से कम नहीं रह गई, जिससे छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए इन्हें खरीदना लगभग असंभव हो गया।
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व्यावसायिक संपत्तियों की संख्या अधिक
जीडीए की अलोकप्रिय संपत्तियों में व्यावसायिक संपत्तियों की संख्या सबसे अधिक है। गोलघर स्थित जीडीए टावर के विभिन्न तलों पर बड़ी संख्या में दुकानें, फूडकोर्ट, रेस्टोरेंट और कार्यालय ब्लाक वर्षों से खाली पड़े हैं। प्रथम तल पर एक दुकान, द्वितीय तल पर पांच दुकानें, तृतीय तल पर एक फूडकोर्ट और एक रेस्टोरेंट, इसके अलावा कई तल पर कार्यालय ब्लाक अब तक आवंटित नहीं हो सके हैं।
इसके अलावा वसुंधरा एन्क्लेव के फेज एक, दो और तीन में स्थित व्यावसायिक भूखंड, बुद्धा मिनी मार्ट (देवरिया बाइपास), बुद्ध विहार पार्ट ए और बी के शापिंग सेंटर, वैशाली आवासीय योजना, राप्तीनगर के विभिन्न चरणों, सिद्धार्थपुरम शापिंग सेंटर, विकास नगर और नवीन ट्रांसपोर्टनगर की कई दुकानें व भूखंड भी वर्षों से खाली पड़े हैं। लांचिंग के समय जिन दुकानों की कीमत चार से पांच लाख रुपये थी, वे अब बढ़कर 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच चुकी हैं, जिससे खरीदार पीछे हटते रहे।
अलोकप्रिय संपत्तियों के चिह्नांकन के साथ ही दरों का निर्धारण किया जा रहा है। दरें तय करने में नई कास्टिंग गाइडलाइन का भी ध्यान रखा जा रहा है। अगले माह तक बोर्ड से मंजूरी के बाद इन संपत्तियों का नए सिरे से आवंटन शुरू कर दिया जाएगा। जिन फ्लैट और दुकानों में मरम्मत आदि की आवश्यकता नहीं है, उनमें कुल कीमत का 25 प्रतिशत देने वालों को तत्काल कब्जा भी दिला दिया जाएगा। प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में आदर्श कास्टिंग गाइडलाइन (मूलभूत सिद्धांत) 2025 को भी रख कर बोर्ड की अनुमति ली जाएगी। नई गाइडलाइंस में काफी सहूलियत मिली है। -
-आनंद वर्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए |
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