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जिम्स में शुरू हुए देश के पहले AI क्लिनिक की हुई बैठक, अमेरिका और एम्स दिल्ली-IIT कानपुर के विशेषज्ञ हुए शामिल

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जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में मंगलवार को एआई क्लिनिक की हुई पहली बैठक में कैंसर-टीबी, ट्रामा में एआई के उपयोग की पहचान के साथ ही स्टार्टअप्स को डॉक्टरों से प्रत्यक्ष क्लिनिकल फीडबैक लिए जाने के संबंध में चर्चा की गई।

साथ ही सरकारी अस्पतालों में एआई समाधान के डिप्लायमेंट और स्केलेबिलिटी पर कैसे काम किया जाएगा। वहीं डॉक्टर–स्टार्टअप सहयोग माडल को मजबूती देने पर काम किए जाने के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए चर्चा की गई।

जिम्स में मंगलवार को एआई क्लिनिक की पहली बैठक की गई । इसमें अमेरिका, लंदन, आइआइटी कानपुर, एम्स दिल्ली और एम्स देवघर के हेल्थकेयर के क्षेत्र के नीति निर्माता, चिकित्सक और एआई विशेषज्ञ के साथ ही मेडटेक स्टार्टअप्स एक मंच पर एकत्रित हुए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एडिशनल डायरेक्टर जनरल आफ हेल्थ सर्विसेज डा. सुजाता चौधरी ने फिजिकल रोल-आउट के तहत क्लिनिक का शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों को एआई के जिम्मेदार और साक्ष्य-आधारित उपयोग में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्लिनिक आने वाले समय में डाक्टरों, स्टार्टअप के अलावा मरीजों के उपचार में मददगार साबित होगी।

गेस्ट ऑफ ऑनर एम्स देवघर के निदेशक व सीईओ प्रो. (डा.) नितिन एम गंगाने, विशेष अतिथि दिल्ली एम्स के आंकोलाजिस्ट डा. अभिषेक शंकर रहे। कानपुर आइआइटी में मेडटेक एवं एआई सेंटर आफ एक्सीलेंस के हेड डा. सर्वेश सोनकर ने आनलाइन माध्यम से भागीदारी की। अस्पताल-आधारित वैलिडेशन एवं क्लिनिकल फीडबैक के महत्व पर प्रकाश डाला। इसमें आनलाइन माध्यम से इंडस ग्लोबल सेतु ग्लोबल फाउंडेशन की को-फाउंडर डा. नंदिनी टंडन शामिल हुईं।
आईआईटी, एनआईटी व एम्स की तकनीकि से किए जा सकेंगे नवाचार

एआई क्लीनिक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित नवाचारों को अस्पतालों का डाटा उपलब्ध कराया जाएगा। इसका अध्ययन कर बेहतर उपचार सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। देश में अभी ऐसी कोई नीति नहीं है कि सरकारी अस्पताल अपना डाटा स्टार्टअप्स के साथ साझा कर सकें, लेकिन इस क्लीनिक से जुड़कर एम्स और जिम्स जैसे अस्पताल डाटा उपलब्ध करा सकेंगे।

आईआईटी, एनआईटी समेत प्राइवेट कॉलेज भी क्लीनिक से जुड़कर अपनी तकनीकी दक्षता के जरिये नवाचारों को विकसित करने में मदद करेंगे। मानिटरिंग कमेटी और एआई विशेषज्ञ आवेदन करने वाले नवाचारों पर मंथन करेंगे और व्यावहारिक होने पर ही डाटा साझा किया जाएगा।

जिम्स निदेशक बिग्रेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के दूरदर्शी दृष्टिकोण के तहत जिम्स जैसे सरकारी संस्थान एआई और मेडटेक इनोवेशन में राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं, जिससे रोगी सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता में सुधार होगा। जिम्स सीएमई के सीइओ डा. राहुल सिंह ने कहा कि यह टाउनहाल सरकारी अस्पतालों को हेल्थकेयर इनोवेशन का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एआई समाधान तभी प्रभावी होंगे जब वे वास्तविक क्लिनिकल वातावरण में काम करें और हर नागरिक तक पहुंचें।
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