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1800 मदरसा शिक्षकों का एरियर अटका: नियम ताक पर रख विपत्र भेजा, कई प्रखंडों में BEo हस्ताक्षर नहीं

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अमरेंद्र कांत, किशनगंज। सरकारी विभाग नियमों से चलता है। नियम के तहत ही सारा कार्य होता है। लेकिन किशनगंज जिला में शिक्षा विभाग के अधिकारी नियम को नहीं मानते हैं। सरकार के नियमों को ताक पर रखकर मदरसा के 18 सौ मदरसा शिक्षकों के अंतर वेतन (एरियर) के भुगतान के लिए विपत्र बनाकर पटना भेज दिया गया।

हालांकि विभाग से फिलहाल आवंटन नहीं आया है। मामला डीएम के संज्ञान में आया तो सभी प्रखंड के वरीय प्रभारी पदाधिकारी को जांच का निर्देश दिया गया। जिसके बाद अधिकारियों द्वारा मामले की जांच शुरू की गई। जिसमें कई प्रखंड में बीइओ के बिना संज्ञान के जिला स्तर पर ही विपत्र पर हस्ताक्षर कर भेजने की बात सामने आ रही है।
मदरसा कमेटी भंग होने पर बीईओ को किया गया अधिकृत

जिले में संचालित करीब 340 मदरसों में से अधिकांश की कमेटी भंग है। जिस कारण संबंधित प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को काउंटर हस्ताक्षर के लिए अधिकृत किया गया था। लेकिन शिक्षा विभाग के तात्कालीन स्थापना डीपीओ ने बीइओ को दरकिनार कर 18 सौ शिक्षकों के अंतर वेतन भुगतान के लिए स्वयं हस्ताक्षर कर प्री ऑडिट सेल में भेज दिया गया।

प्री ऑडिट सेल से स्वीकृति भी मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि सरकार से आवंटन नहीं आया है। आवंटन आने पर राशि का भुगतान होगा। हालांकि इसमें कई तरह के वारा-न्यारा की बात सामने आ रही है।
बीईओ माना कि नहीं कराया गया हस्ताक्षर

प्रविधान के तहत बीइओ से काउंटर साइन कराना अनिवार्य था। परंतु कुछ मदरसा स्कूलों द्वारा हस्ताक्षर कराया गया तो कुछ के द्वारा सीधे जिला भेज दिया गया। जिले के बहादुरगंज प्रखंड के बीइओ की माने तो उनके द्वारा 80 मदरसा में से 41 पर हस्ताक्षर नहीं किया गया।

इसी तरह टेढ़ागाछ के 25 मदरसों में से 10 पर उनके स्तर से हस्ताक्षर नहीं किया गया, जबकि पोठिया के 15 मदरसों में से पांच पर बीईओ को हस्ताक्षर नहीं लिया गया, जबकि मदरसा बोर्ड का स्पष्ट निर्देश है कि मदरसा कमेटी भंग रहने की स्थिति में बीइओ का काउंटर साइन अंतर वेतन के भुगतान के लिए आवश्यक है।

सूत्र बताते हैं कि जिन विपत्र पर बीइओ ने काउंटर साइन नहीं किया उन विपत्रों को शिक्षा विभाग के स्थापना डीपीओ ने हस्ताक्षर कर प्री आडिट सेल को भेज दिया। अब सवाल उठता है कि जब नियम के अनुसार हस्ताक्षर ही नहीं हुआ तो विपत्र गलत भी हो सकता है। आखिर उस समय के डीपीओ स्थापना ने बिना बीइओ के काउंटर साइन के कैसे प्री ऑडिट सेल में भेजा गया। हालांकि मामले में जांच के बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा।
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