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आग में मेट्रो रेल इंजीरियर का पूरा परिवार खत्म हो गया।
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। मुकुंदपुर डीएमआरसी स्टाफ क्वार्टर की पांचवीं मंजिल स्थित फ्लैट में रूम हीटर में धमाके के बाद फैली आग में मेट्रो रेल इंजीरियर का पूरा परिवार खत्म हो गया। ठंड से बचने के लिए कमरे में हीटर लगा कर सो रहे डीएमआरसी में कार्यरत असिस्टेंट सेक्शन इंजीनियर अजय विमल उनकी पत्नी नीलम और 10 वर्षीय उनकी बेटी जान्हवी की मौत हो गई।
तीनों के शव एक ही बेड पर मिले, इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि शार्ट सर्किट व धमाके के बाद पूरा कमरा धुएं से भर गया व तीनों बेसुध हो गए और बाद में जल गए। ऐसी स्थिति में आक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और कार्बन मोक्नोआक्साइड गैस से दम घुटने लगता है। यही कारण है कि तीनों बिस्तर से हिल-डूल भी नहीं सके।
पुलिस अधिकारी का भी कहना है कि शुरुआती जांच में रूम में चल रहे हीटर में धमाके के बाद आग लगी है। पुलिस शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।
उत्तर पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि सोमवार देर रात करीब 2:39 बजे आदर्श नगर थाना पुलिस को मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के सामने मेट्रो अपार्टमेंट्स की पांचवीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में आग लगने की जानकारी मिली। इससे पहले सोसायटी के इन-हाउस फायर-फाइटिंग सिस्टम की मदद से करीब आधा घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। आग पर काबू होने के बाद दमकल कर्मियों ने तलाशी अभियान चलाया।
इस दौरान फ्लैट के कमरे में तीन लोगों के जले हुए शव मिले। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौके पर क्राइम और फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। टीम ने कई साक्ष्य जुटाए हैं। आग बुझाने के दौरान राकेश नाम का फायरकर्मी भी घायल हो गया। जिसे प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
उत्तरी-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि इस मामले में कई अन्य पहलुओं से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। मृतक मूलरूप से उत्तर प्रदेश के एटा के रहने वाले थे। बाद में पूरा परिवार मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहने लगे थे।
मुख्य गेट में लगा था सेंट्रल लाक, दूसरा गेट भी अंदर से था बंद
दमकल अधिकारी ने बताया कि आग लगने की जानकारी मिलते ही छह गाड़ियां मौके पर पहुंची। टीम को पता चला कि मुख्य गेट अंदर से बंद है। पहले लोहे के गेट में सेंट्रल लाक लगा था। दमकल कर्मियों ने लोहे वाले गेट के कब्जे काटने के बाद लकड़ी वाले दरवाजे को तोड़ा। अंदर धुआं और आग थी। दमकल कर्मियों व स्थानीय लोगों ने करीब साढ़े तीन बजे आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया।
वर्ष 2006 से डीएमआरसी में नौकरी कर थे विमल
बाबू जगजीवन राम शवगृह के बाहर मौजूद डीएमआरसी के एक अधिकारी ने बताया कि अजय विमल परिवार के साथ इस सोसायटी में वर्ष 2016 से रह रहे थे। तभी यह सोसायटी बनकर तैयार हुई थी। जहां डीएमआरसी स्टाफ को क्वार्टर अलाट हुए थे। विमल की तैनाती बाराखंभा स्थित कार्यालय में थी। अजय ने वर्ष 2006 में डीएमआरसी को जाइन किया था।
वन-बीएचके फ्लैट में रहते थे विमल
डीएमआरसी प्रवक्ता ने डीएमआरसी के स्टाफ क्वार्टर में सुरक्षा मानकों के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि सभी सरकारी नियमों का ध्यान रखा जाता है। विमल यहां वन बीएचके फ्लैट में रहते थे। जिसमें एक बड़ा हाल, बड़ा बेडरूम, किचन, शौचालय, बालकनी हैं। यहां पहले से ही फायर सिस्टम लगा हुआ है। फायर व बाकी अन्य के सिस्टम और एनओसी समय-समय पर अपडेट होते हैं।
सोसायटी में लगे फायर फाइटर सिस्टम से आग पर काबू पा लिया
डीएमआरसी अधिकारी ने बताया कि इस सोसायटी में 350 फ्लैट हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एंट्री और एग्जिट दो गेट हैं। जहां 24 घंटे सुरक्षाकर्मी रहते हैं। जिस समय आग लगने का पता चला। दमकल के आने से पहले डीएमआरसी के कालोनी में लगे फायर फाइटर सिस्टम से आग पर काबू पा लिया गया था। आग बुझाने में यहां रहने वाले डीएमआरसी कर्मचारियों की भूमिका अहम रही।
पिता एमपी पुलिस में इंस्पेक्टर थे, बड़ा भाई यूपी पुलिस में है इंस्पेक्टर
मृतक अजय विमल की बहन ऊषा ने बताया कि वह नोएडी में रहती हैं। वह दो भाई और तीन बहन हैं। अजय उनके छोटे भाई थे। बड़े भाई मनोज उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर हैं। उनके पिता मध्य प्रदेश पुुलिस में इंस्पेक्टर के पद से रिटायर्ड थे। बीते रक्षा बंधन पर उनकी मौत हो गई थी। उनकी माता भी अब इस दूनिया में नहीं हैं। |
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