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Rewari के 16 गांवों में रसायन युक्त पानी से 80 हजार की आबादी प्रभावित, पीना छोड़िए, नहाने लायक भी नहीं भूजल

deltin33 5 day(s) ago views 113
  

नाला पार करते लोग। जागरण



जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। इंदौर में दूषित पानी पीने के बाद हुई मौतों के बाद पानी की शुद्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिले के 16 गांव ऐसे हैं, जहां का भूजल दूषित हो चुका है। यहां का पानी पीने योग्य तो छोड़ो नहाने के लायक भी नहीं है।

फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायन युक्त पानी साहबी बराज के रास्ते आसपास के गांवों में खेतों के रास्ते पहुंच चुका है। जिसकी वजह से भूजल जहरीला हो गया है। 500 एकड़ से ज्यादा भूमि बंजर होने के कगार पर है।

दैनिक जागरण की टीम ने ‘हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ’ अभियान के तहत औद्योगिक कस्बा बावल और धारूहेड़ा के गांव खलियावास, भटसाना, निखरी, खरखड़ा, बनीपुर, सुठानी, जलियावास सहित 10 से ज्यादा गांवों की पड़ताल की, जिसमें चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि दूषित पानी की वजह से इन गांवों में पेट में संक्रमण और कैंसर जैसी घातक बीमारी के रोगी बढ़े हैं। दूषित पानी से इन गांवों में रहने वाली 80 हजार से ज्यादा की आबादी सीधे प्रभावित है।
10-15 साल पुरानी है ये समस्या

दरअसल, साहबी के आसपास के करीब 10 गांवों में दूषित पानी की समस्या करीब 15 साल और बावल में फैक्ट्रियों के साथ लगते गांवों में यह समस्या करीब 10 साल पुरानी है। साहबी बराज में छोड़े जाने वाले रसायन युक्त दूषित पानी का मामला तो तीन सालों से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रहा है।

एनजीटी के आदेश पर ही तीन साल में अलग-अलग लैब से छह बार यहां के पानी की सैंपलिंग हो चुकी है। हर बार सैंपल फेल मिले हैं।

गांव खरखड़ा के रहने वाले प्रकाश यादव ने पहली बार इस मामले को पहली बार वर्ष 2020 में हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अलावा केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के समक्ष उठाया था। लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर प्रकाश यादव ने वर्ष 2022 में एनजीटी कोर्ट का सहारा लिया।

जिसके बाद हरकत में आए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने जनस्वास्थ्य विभाग पर करीब पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने माना था कि रेवाड़ी शहर के अलावा धारूहेड़ा व बावल की एसटीपी से बिना ट्रीट किए ही पानी साहबी बराज में छोड़ा जाता है। दूषित पानी का यह मामला हाल में भी एनजीटी में पेंडिंग है।
यह गांव सीधे तौर पर प्रभावित

    क्षेत्र प्रभावित गांव
   
   
   बावल क्षेत्र
   आसलवास
   
   
   पातुहेड़ा
   
   
   ड्योढई
   
   
   बनीपुर
   
   
   सुठानी
   
   
   जलियावास
   
   
   इब्राहिमपुर
   
   
   धारूहेड़ा क्षेत्र (बावल से सटा)
   
   
   धारूहेड़ा क्षेत्र
   खरखड़ा
   
   
   ततारपुर खालसा
   
   
   भटसाना
   
   
   निखरी
   
   
   खलियावास
   
   
   तीतरपुर
   
   
   मसानी
   
   
   सुनारिया
   

प्रमुख समस्या: फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायन युक्त दूषित पानी साहबी बराज के माध्यम से खेतों के रास्ते इन गांवों तक पहुंच रहा है।

गंभीर घटना: 17 जून पिछले साल बनीपुर गांव के समीप रसायनयुक्त पानी पीने से 20 गायों की मौत हो गई।


हमारे गांव में कुछ माह पहले ही रसायन युक्त पानी पीने से 20 गायों की मौत हो गई थी। फैक्ट्रियों द्वारा बिना ट्रीट किए ही पानी बाहर छोड़ दिया जाता है। यह समस्या 10 सालों से बनी हुई है। अब तो आसपास का भूजल एक तरह से जहरीला हो चुका है।-पवन कुमार, सरपंच, बनीपुर।



हमारे ही नहीं बल्कि, आसपास के सभी गांवों फैक्ट्रियों से घिरे हुए हैं। फैक्ट्रियों से रसायन युक्त पानी निकलता है, जो गांवों तक पहुंच रहा है। जिसकी वजह से गांवों में कई तरह की बीमारियों के रोगी बढ़े हैं। हैंडपंप या कुएं का पानी पीने के लायक नहीं है। गांव के लोग बाहर से आरो प्लांट का पानी पीने के लिए मंगवाते है।
-सतीश कुमार, पातुहेड़ा।


शहर के अलावा धारूहेड़ा और बावल की एसटीपी से बिना ट्रीट किए ही काफी समय से पानी छोड़ा जा रहा है। हमने समय-समय पर कार्रवाई की है। पहले पांच करोड़ रुपये का जनस्वास्थ्य विभाग पर जुर्माना भी लगाया था। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
-अजय कुमार, एसडीओ, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।


दूषित पानी की समस्या को लेकर 219 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बन चुका है। जिसका कार्य सिंचाई विभाग को करना है। पहले चरण में 125 करोड़ रुपये की लागत से साहबी बराज पर पंप हाउस बनाया जाएगा। यहां के पानी को रिफिलिंग किया जाएगा। इसके बाद लाइन बिछाकर इस पानी को ड्रेन नंबर आठ में छोड़ा जाएगा। तीन विभाग आपस में मिलकर प्रोजेक्ट की कुल राशि का वहन करेंगे। राशि जारी करने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग और एचएसआइआइडीसी को पत्र लिखा जा चुका है।
-वीके बाघोतिया, एक्सइएन, सिंचाई विभाग।


रेवाड़ी, बावल और धारूहेड़ा की फैक्ट्रियों से रसायन युक्त पानी साहबी बराज में पहुंचता है। यही दूषित पानी आगे खलियावास होते हुए अब तो मीरपुर तक पहुंच चुका है। यह पानी पिछले 10-15 सालों से आ रहा है। सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। यह हाल तब है, जब प्रदेश सरकार में क्षेत्र के ही पर्यावरण मंत्री हैं और यहीं से स्वास्थ्य मंत्री है। भूजल दूषित होने से लोग बीमारियों से ग्रस्त है।
-

-राहुल खोला, खलियावास।


रसायनयुक्त पानी की वजह से गांव में बहुत बुरे हालात हैं, लोगों का जीना दूभर हो रहा है। एक बार जो बीमारी लग जाए वह जल्दी से ठीक नहीं होती। पेट में संक्रमण के रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। आने वाले समय में इंदौर में जो हालात हो रहे हैं, ऐसे हालात होने में यहां भी देरी नहीं लगेगी।
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-संदीप कुमार, निखरी।


हमारे गांव में दूषित पानी की वजह से हालात 10 साल से खराब है। भूजल दूषित हो चुका है। लोग कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं। पीने का पानी बाहर से आरटो प्लांट से आने वाली गाड़ियों से लिया जाता है। हम तो सालों से सुनते आ रहे हैं कि समाधान होगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं है।
-

-बलराम, निखरी।


गांव की श्मशान भूमि, सती माता का मंदिर तक रसायन युक्त पानी में डूबे हुए हैं। गांव में पैरालाइज के काफी मामले आए हैं। कैंसर के भी काफी मरीज हैं। गांव में लगे हैंडपंप तक इस जहरीले पानी में डूबे हुए हैं। गांव का पानी पीने के ही नहीं, बल्कि नहाने के लायक भी है।
-

-चरण सिंह, भटसाना।
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