घटना वाले दिन अस्पताल में दाखिल रोहित कुमार।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। नेशनल यूथ अवाॅर्डी और समाज सेवा के लिए रूस में सम्मानित रोहित कुमार ने पुलिस चौकी में हुई मारपीट के मामले में समझौता कर लिया है। उन्होंने अब किसी भी प्रकार की मारपीट की घटना से इनकार किया है। इस मामले में दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर रद कर दिया है।
एफआईआर रद होने से मारपीट के आरोप में निलंबित एएसआई सेवा सिंह, एएसआई रणजीत सिंह और काॅन्स्टेबल दीपक को बड़ी राहत मिली है। भले ही मामला समाप्त हो गया है, लेकिन पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं। वहीं, यह समझौता किन परिस्थितियों में हुआ, यह भी विचार करने वाली बात है।
मार्च 2025 में रोहित कुमार ने हल्लोमाजरा पुलिस चौकी में तैनात पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने ने बताया था कि वह घटना वाली शाम अपने दोस्त गोबिंद के साथ हल्लोमाजरा पुलिस चौकी पहुंचे थे। उनके साथ दो परिचित युवतियां भी थीं, जो अपने पिता के खिलाफ शारीरिक शोषण की शिकायत दर्ज कराने आई थीं।
रोहित का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय युवतियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। जब उन्होंने और उनके दोस्त ने इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया।
रोहित ने यहां तक कहा था कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जमीन पर गिराकर डंडों से बेरहमी से पीटा था। दावा किया था कि इस मारपीट में उनका अंगूठा टूट गया, सिर और चेहरे पर गंभीर सूजन आ गई और रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर चोट पहुंची।
घटना के बाद रोहित कुमार को इलाज के लिए जीएमसीएच-32 में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने एसएसपी कंवरदीप कौर को शिकायत देकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद आला अधिकारियों के हस्तक्षेप से चौकी में तैनात दो एएसआई और एक काॅन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया था। तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी, जो कि हाईकोर्ट में विचाराधीन था।
रोहित कुमार ने हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने का एफिडेविट दाखिल किया। इसके बाद केस को रद करने के लिए याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दर्ज एफआईआर को रद कर दिया। |
|