भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी पूर्णेंदु तिवारी को कतर में एक अलग वित्तीय मामले में दोबारा गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक, पूर्णेंदु तिवारी उन आठ भारतीय नागरिकों में शामिल थे, जिन्हें साल 2022 में कतर में हिरासत में लिया गया था। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि उनकी यह नई गिरफ्तारी 2022 के पुराने मामले से जुड़ी नहीं है। उसी पुराने मामले को लेकर पहले भारत और कतर के बीच उच्च स्तर पर राजनयिक बातचीत भी हुई थी।
पूर्णेंदु तिवारी कौन हैं?
पूर्णेंदु तिवारी भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं और नेविगेशन (जहाजों की दिशा व संचालन) के एक्सपर्ट रहे हैं। वे कमांडर रैंक तक पहुंचे थे। उन्होंने INS मगर की कमान संभाली थी और भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में फ्लीट नेविगेटिंग ऑफिसर के रूप में भी काम किया था। इसके अलावा, उन्होंने राजपूत क्लास के डिस्ट्रॉयर जहाज़ों पर भी सेवा दी है। वे पहले ऐसे सशस्त्र बलों के अनुभवी अधिकारी थे जिन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार मिला था। यह सम्मान उन्हें साल 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिया था। नौसेना से रिटायर होने के बाद, पूर्णेंदु तिवारी दहारा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज में काम कर रहे थे। यह एक निजी रक्षा से जुड़ी कंपनी है, जो कतर अमीरी नौसेना बल को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देती है।
2022 का है मामला
अगस्त 2022 में पूर्णेंदु तिवारी और भारतीय नौसेना के सात अन्य पूर्व अधिकारियों को दोहा में एक जांच के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 2023 में कतर की अदालत ने इन सभी पर मुकदमा चलाया और उन्हें मौत की सज़ा सुना दी। हालांकि, कतर के अधिकारियों ने इस मामले में कभी भी सार्वजनिक रूप से साफ़ और विस्तृत आरोपों की जानकारी नहीं दी। इस मामले को लेकर भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की। नरेंद्र मोदी ने भारत यात्रा के दौरान शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से यह मुद्दा उठाया था।
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कतर के अमीर ने बाद में सज़ा में राहत दी। इसके बाद आठ में से सात पूर्व नौसेना अधिकारियों को रिहा कर दिया गया। मौत की सज़ा कम होने और राजनयिक बातचीत के बाद ये सभी सुरक्षित भारत लौट आए।
अन्य लोगों के मुकाबले पूर्णेंदु तिवारी कतर में ही रुके रहे, क्योंकि उनके खिलाफ एक अलग वित्तीय मामले की जांच चल रही थी। सूत्रों के अनुसार, इसी वजह से उनकी दोबारा गिरफ्तारी हुई है और अब वे भारत वापस नहीं आ पाएंगे। बताया गया है कि उन्हें लगातार हिरासत में रखा गया और फिर से जेल भेज दिया गया है। इस बीच, उनके परिवार ने उनकी रिहाई के लिए सीधे भारत सरकार के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया है। हालांकि, विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। |
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