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हिमाचल में हुआ था इंदौर जैसा घटनाक्रम, दूषित पानी ने ले ली थी 32 लोगों की जान; ताजा घटनाक्रम के बाद नए निर्देश जारी

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दूषित पानी पीने से इंदौर जैसी घटना हिमाचल प्रदेश के शिमला में भी हो चुकी है। प्रतीकात्मक फोटो  



राज्य ब्यूरो, शिमला। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत से हाहाकार मचा है। हिमाचल की राजधानी शिमला में भी 2016 में सीवरेजयुक्त पानी पीने से 32 लोगों की पीलिया से मौत हो गई थी। घटना भले ही 10 साल पुरानी है, लेकिन लोग उसे भुला नहीं पाए हैं।

इसके बाद हिमाचल सरकार ने अपनी नीति में कई बदलाव किए थे। लोगों को स्वच्छ पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया था। हालत यह है कि शहरी क्षेत्रों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पीने के पानी की जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है।
पानी स्वच्छ करने की तकनीक पारंपरिक

शहर व ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं में पानी के सैंपल लिए जाते हैं। लोग पानी पी लेते हैं और जांच रिपोर्ट उसके बाद आती है। ज्यादातर परियोजनाओं में पानी को स्वच्छ करने की तकनीक पारंपरिक है। पेयजल परियोजनाओं में पंपिंग से पहले पानी को साफ किया जाता है। वहां फिल्टर बैड बने होते हैं। रेत, पत्थर के बीच से पानी मुख्य भंडारण टैंक में आता है। यहां पर उसमें ब्लीचिंग पाउडर मिलाया जाता है। कुछ स्थानों पर ओजोनेशन, नैनो फिल्ट्रेशन का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसकी संख्या बेहद ही कम है।
72 प्रयोगशालाओं में होती है जांच

हिमाचल के 17,632 गांवों में हर घर को नल से जल उपलब्ध करवाया जा चुका है। प्रदेश में जल गुणवत्ता की जांच के लिए 72 प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें जिला, उपमंडल और एक राज्यस्तरीय प्रयोगशाला शामिल है।
एक वर्ष में लिए 2,16,382 सैंपल, पांच हुए फेल

जल शक्ति विभाग की प्रमुख अभियंता अंजू शर्मा ने बताया कि पीने के पानी के 365 दिन में 2,16,382 नमूने लिए गए हैं। केवल पांच मानकों पर खरे नहीं उतरे। 1,71,250 नमूनों की जांच फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीकेएस) के माध्यम से की गई। विभाग का दावा है कि 21,392 पेयजल स्रोतों और 15,611 गांवों के पानी के नमूनों की जांच एक साल में की गई है। 18,784 पेयजल स्रोतों के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण किए।
मुख्यमंत्री स्वच्छ जल शोधन योजना

जल शक्ति विभाग के चार जोन धर्मशाला, शिमला, हमीरपुर व मंडी हैं। प्रदेश में कुल 10067 पेयजल परियोजनाएं हैं। इसके अलावा 41835 हैंडपंप है। विभाग में कुल 51 श्रेणियों में 4293 पद सृजित हैं। इसमें से 1853 पद रिक्त हैं। जेई के 704 में से 260 पद रिक्त हैं। प्रदेश में जल आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री स्वच्छ जल शोधन योजना शुरू की गई है। योजना में ओजोनेशन, नैनो फिल्ट्रेशन का उपयोग कर जल शोधन कर साफ पानी लोगों को उपलब्ध करवाया जाएगा। घरेलू और व्यावसायिक जल आपूर्ति योजनाओं का भी उन्नयन किया जाएगा। योजना में 80 करोड़ रुपये के बजट का प्रविधान है।
कम बजट से परियोजना निर्माण में दिक्कत

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नाबार्ड-आरआइडीएफ के तहत 474 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था। इसे घटाकर मात्र 186.9 करोड़ रुपये कर दिया है, जो अत्यंत कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में नाबार्ड-आरआइडीएफ के लिए 437 करोड़ रुपये का बजट प्रविधान किया था। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नाबार्ड द्वारा जल शक्ति विभाग के तहत 300 करोड़ रुपये का प्रक्षेपण किया गया है। 30वीं किस्त (ट्रांच) के अंतर्गत कुल 432 योजनाएं प्रगतिशील हैं, जिनके लिए आगामी तीन वर्ष में कुल 1157 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इस स्थिति को देखते हुए 250.1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग सरकार को भेजी जा चुकी है।
हर 10 दिन बाद निरीक्षण करने का निर्देश

इंदौर की घटना के बाद प्रदेश सरकार भी हरकत में आ गई है। सचिव जल शक्ति विभाग डा. अभिषेक जैन ने सोमवार को अधिकारियों से बैठक कर पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के उपायों की समीक्षा की। जैन ने अधिकारियों को हर 10 दिन में जल स्रोतों और भंडारण टैंकों का निरीक्षण कर नियमित रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, खंड रिसोर्स पर्सन और फील्ड स्टाफ को नालों, खड्डों, झरनों और अन्य स्रोतों की जांच करने और फील्ड टेस्ट किट से पानी की गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने को कहा। बैठक का उद्देश्य न केवल विभाग द्वारा चलाई जा रही पेयजल योजनाओं का जीर्णोद्धार सुनिश्चित करना था, बल्कि मल निकासी संयंत्रों की नियमित निगरानी के लिए आवश्यक उपाय अपनाने के लिए दिशा-निर्देश देना भी था।  
15 दिनों में सफाई, रिसाव पर कड़ी निगरानी

अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सफाई और सुधार कार्य 15 दिन में पूरे करें। जल शोधन संयंत्रों और मल निकासी संयंत्रों की नियमित जांच करने और रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने जनता से जल स्रोतों की सुरक्षा में सहयोग की अपील की और कहा कि जरूरत पड़ने पर लोग स्वयं भी पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में दे सकते हैं। उन्होंने पानी की पाइप लाइनों में रिसाव पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। जल शक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री स्वयं विभाग की पेयजल और अन्य योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित कर रहे हैं।
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