जागरण संवाददाता, बहराइच। जिले में गर्भवती महिलाओं के बीच एनीमिया को लेकर सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। पहले उल्टी, गैस और मिथकों के कारण महिलाएं आयरन–फोलिक एसिड की गोलियां लेने से बचती थीं, लेकिन अब एक साधारण ‘लाल बिंदी वाला फोल्डर’ उन्हें रोजाना दवा लेने के लिए प्रेरित कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के इस पहल से अब तक 1683 एनीमिक गर्भवती महिलाओं ने नियमित आयरन सेवन शुरू किया। इनमें से 1491 ने स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया और 690 का हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से ऊपर पहुंच गया। सिर्फ भोजन से इतनी आयरन मात्रा पूरी नहीं हो पाती, इसलिए सभी गर्भवती के लिए रोजाना आयरन फोलिक एसिड का सेवन जरूरी माना जाता है। इससे एनीमिया, समयपूर्व प्रसव और कम वजन के जोखिम कम होते हैं।
इसी कमी को पूरा कराने में यह फोल्डर अहम भूमिका निभा रहा है। फोल्डर में गर्भस्थ शिशु का चित्र और 180 लाल बिंदिया लगी होती हैं। महिलाएं रोज गोली खाने के बाद एक बिंदी उस चित्र पर चिपकाती हैं। चित्र भरता है, उन्हें लगता है कि उनका बच्चा ‘मजबूत’ हो रहा है।
एनएफएचएस-पांच के अनुसार जिले में 48 फीसदी गर्भवती एनीमिक हैं। यह नवाचार उनकी झिझक तोड़ने में कारगर साबित हो रहा है। आशा कार्यकर्ता फोल्डर के साथ पोषण वाटिकाएं विकसित कराने में महिलाओं की मदद कर रही हैं। बलहा की एएनएम रेखा कुमारी बताती हैं कि अब गर्भवती महिलाएं नियमित चारों प्रसव पूर्व जांच करवा रही हैं।
डीएचईआईओ बृजेश सिंह ने बताया कि आयरन लेने के बाद काला मल या हल्की गैस आदि प्रतिक्रियाएं सामान्य हैं। सीएमओ डा. संजय कुमार के अनुसार इस वर्ष जिले में 83.15 लाख आयरन–कैल्शियम टैबलेट वितरित की गई हैं।
जिले में एनीमिया कम करना हमारी शीर्ष प्राथमिकताओं में है। परिवारों का सहयोग मिले तो एनीमिया रोकथाम और भी आसान हो जाएगी।
-अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी |
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