15 साल की उम्र में ब्रेल लिपि का किया आविष्कार।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली: अगर आपके हौसले बुलंद हो और आपके अंदर कुछ करने का जज्बा हो तो जीवन की तमाम चुनौतियां भी आपको अपने सपने को पूरा करने से रोक नहीं सकती है। जी हां इसी का एक जीता जागता उदाहरण है, लुई ब्रेल। एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने महज 15 साल की उम्र में ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था। फ्रांस के एक छोटे से गांव में जन्मे लुई ब्रेल केवल पांच साल की उम्र में ही अपनी आंखों की रोशनी खो बैठे थे।
भले ही एक दुर्घटना ने उनकी आंखों की रोशनी छीन ली हो, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वह उन करोड़ों दृष्टिबाधित लोगों की आंखों की रोशनी बने, जो देख न पाने के कारण लिख और पढ़ नहीं पाते थे। लुई ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए छह बिंदुओं पर आधारित लिपि का आविष्कार किया और तमाम दृष्टिबाधित लोगों को स्वतंत्र रूप से पढ़ने व लिखने के लिए एक बेहतरीन प्रणाली मुहैया करवाई।
साधारण परिवार में जन्म
लुई ब्रेल का जन्म 04 जनवरी, 1809 को फ्रांस के एक छोटे-से गांव कूपव्रे में एक बेहद ही साधारण परिवार में हुआ था। लुई के पिता एक कारखाने में साइमन-रेने ब्रेल घोड़े की जीन और चमड़े बनाने का काम किया करते थे। लुई अपने माता-पिता की चार संतान में सबसे छोटे थे।
एक हादसे ने बदली पूरी जिंदगी
साल 1812 की बात है जब लुई अपने पिता के कारखाने में खेल रहे थे। तभी खलते वक्त कारखाने में मौजूद एक नोकीले औजार से उनकी दाहिनी आंखों में गहरी चोट लग गई। तभीइंफेक्शन फैलने के कारण उनकी बाई आंख भी इससे प्रभावित हो गई और महज पांच साल की उम्र में वह पूरी तरह से दृष्टिहीन हो गए। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लुई ने जल्द ही सुनकर एवं स्पर्श करके सीखना शुरू कर दिया।
10 साल की उम्र में मिली छात्रवृत्ति
लुई ने अपनी शुरुआती शिक्षा अपने गांव से ही पूरी की थी। इसके बाद उन्हें दस साल की उम्र में रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ\“ से छात्रवृत्ति मिली और उन्हें यहां पढ़ने का एक सुनहरा अवसर मिला। बता दें, यह एक ऐसा संस्थान था, जहां उभरे हुए रोमन अक्षरों का उपयोग करके पढ़ाई की जाती थी। इस संस्थान में लुई ने संगीत, इतिहास और विज्ञान विषय की शिक्षा ली थी। दिलचस्प बात यह है कि बाद में लुई इसी संस्थान में बतौर शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे।
ब्रेल लिपि का यहां से आया आइडिया
दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि बनाने का आइडिया लुई को तब आया। जब वह 15 साल की उम्र में फ्रांस की सेना के कैप्टन चार्ल्स बार्बियर से मिले। चार्ल्स ने लुई को \“नाइट राइटिंग\“ और \“सोनोग्राफी\“ के बारे में बताया। यह एक ऐसी लिपि थी, जिसकी मदद से सैनिक अंधेरे में पढ़ाई किया करते थे। आपको बता दें, यह कुल 12 बिंदुओं पर आधारित थी। जब लुई ने इस अवधारणा को समझा तभी लुई को ब्रेल लिपि बनाने का विचार आया और उन्होंने 12 बिंदुओं की जगह 6 बिंदुओं का प्रयोग करके 64 अक्षर और चिह्र बनाए। यही वहीं उन्होंने ब्रेल लिपि से विराम चिह्र और गणित चिह्र भी बनाए।
प्रिंसिपल ने उनके हुनर को परखा
लुई ब्रेल ने जब ब्रेल लिपि पूरी की तो उन्होंने परीक्षण के लिए इसे अपने प्रिंसिपल के सामने प्रस्तुत किया। लेकिन प्रिंसिपल ने उनकी काबिलियत को परखने के लिए अखबार के एक लेख को जोर से पढ़ा। तभी लुई ने इस लेख को तुरंत ब्रेल लिपि में नोट किया और फिर अपने प्रिंसिपल को पूरा लेख पढ़कर सुना दिया। उनके इस काम से प्रिंसिपल लुई से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए यह बात भी स्पष्ट हो गई कि ब्रेल लिपि वाकई दृष्टिबाधित लोगों के लिए कारगर है।
यह भी पढ़ें: Career in Food Safety: इन एग्जाम से चुनें फूड सेफ्टी की फील्ड में सुनहरा भविष्य |
|