search

Bihar Government: मखाना बीज के साथ टूल्स किट पर भी अनुदान, किसानों की बढ़ेगी आमदनी

deltin33 2026-1-6 14:26:49 views 970
  

मखाना अवयव योजना से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बल



सुनील कुमार, सुपौल। वैसे तो कोसी प्रभावित सुपौल जिले में मखाना खेती की खासियत और महत्व सदियों पुरानी है। पिछले एक दशक से सरकार और विभाग ने इसे आधुनिक तकनीक और विज्ञानी तरीके से उन्नत कर मखाना क्रांति की शुरुआत की है। मखाना क्रांति को और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए मखाना अवयव योजना लांच की है। इस योजना के तहत मखाना किसानों को क्षेत्र विस्तार, उन्नत बीज वितरण और टूल्स किट पर अनुदान देने का फैसला लिया है।

इससे न सिर्फ कृषि आधारित आजीविका को मजबूती मिलेगी, बल्कि गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। जाहिर सी बात है कि सरकार का लक्ष्य न सिर्फ मखाना खेती का क्षेत्र विस्तार करना है बल्कि आधुनिक और लाभकारी बनाना भी है। योजना के अंतर्गत 25 डिसमिल से लेकर 5 एकड़ तक मखाना की खेती करने वाले किसान अनुदान के पात्र होंगे।

दरअसल, जिले में कोसी क्षेत्र, खासकर सीपेज वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर मखाना की खेती होती है। पारंपरिक रूप से यह खेती जलभराव वाले तालाबों और निचली जमीन में की जाती रही है। लेकिन तकनीकी सहयोग और उन्नत बीजों के कारण अब किसान गहरी और अपेक्षाकृत सूखी जमीन में भी मखाना की खेती करने लगे हैं। इससे खेती का दायरा बढ़ा है और उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।
पोषण और बाजार दोनों में बढ़ती मांग

मखाना न केवल किसानों के लिए आय का मजबूत स्रोत है, बल्कि पोषण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। देश-विदेश में मखाना की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इसे कैश क्रॉप के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना है।
मील का पत्थर साबित होगी योजना

मखाना खेती श्रम आधारित कृषि है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। बीज से लेकर कटाई, सुखाने और प्रसंस्करण तक कई स्तरों पर स्थानीय लोगों को काम मिलता है। विभाग का मानना है कि मखाना अवयव योजना से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अधिकारियों की मानें तो मखाना अवयव योजना किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्नत बीज, आधुनिक उपकरण और सरकारी अनुदान के सहारे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकेंगे। इससे मखाना खेती को संगठित रूप मिलेगा और किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।
लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा मखाना

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मखाना अवयव योजना जैसी पहल ग्रामीण गरीबी उन्मूलन में अहम भूमिका निभा सकती हैं। जिन क्षेत्रों में पारंपरिक खेती से अपेक्षित आय नहीं हो पा रही थी, वहां मखाना एक वैकल्पिक और लाभकारी फसल के रूप में उभर रही है।

सरकार की यह योजना किसानों को तकनीक, संसाधन और बाजार से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है।

खासकर सरकार ने जब से जिले को मखाना कॉरिडोर से जोड़ा है तब से मखाना उत्पादन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलने लगी है। इससे मखाना बिहार की पहचान के साथ-साथ किसानों की आर्थिक रीढ़ भी बनने की संभावना प्रबल हो गई है।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
476043