शिवसेना और भाजपा ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।
दिनेश महाजन, जम्मू। जम्मू शहर व आसपास के इलाकों में अवैध बस्तियां बनाकर रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर अब विरोध की आवाज तेज होने लगी है। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का कहना है कि इन विदेशी नागरिकों की मौजूदगी न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है, बल्कि इससे प्रशासनिक और संवेदनशील संस्थानों पर भी खतरा बढ़ रहा है।
शिव सेना ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजने के लिए बाकायदा मुहिम शुरू कर दी है। संगठन का आरोप है कि अवैध रूप से रह रहे ये लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे जम्मू में बस गए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
अन्य सामाजिक एवं राजनीतिक दलों ने भी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए केंद्र और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
जम्मू में रोहिंग्या-बांग्लादेशियों से बढ़ता खतरा
जम्मू में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और आम लोगों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। आरोप है कि ये लोग शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध बस्तियां बनाकर रह रहे हैं, जिनका कोई स्पष्ट रिकार्ड प्रशासन के पास नहीं है। इससे न केवल आंतरिक सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा है, बल्कि सैन्य व अर्धसैनिक प्रतिष्ठानों, सरकारी दफ्तरों और महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि बिना सत्यापन रह रहे इन लोगों के बीच असामाजिक तत्वों के छिपे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ने, जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है। इसी कारण अब व्यापक स्तर पर इनकी पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत देश से बाहर भेजने की मांग तेज हो गई है।
रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक अब देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। यह गंभीर विषय है कि करीब दो दशक पहले जब इन्हें जम्मू-कश्मीर में बसाया गया तो इन्हें केवल जम्मू क्षेत्र में ही क्यों बसाया गया। इसके पीछे तत्कालीन सरकार की एक साजिश थी, जिसका उद्देश्य जम्मू की जनसंख्या संरचना को बदलना था। अब उचित समय आ गया है कि इन सभी को उनके मूल देशों में वापस भेजा जाए, जहां के वे रहने वाले हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में कड़े और कड़े कदम उठाने की मांग की।
- भाजपा प्रवक्ता जोरावर सिंह जम्वाल
रोहिंग्या और बांग्लादेशियों नागरिकों का जम्मू में रहना चिंता का विषय है। जिस तेजी से जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी अपराध का चेहरा बनते जा रहे हैं, वह स्थानीय लोगों के लिए खतरे की घंटी है। बिना समय गंवाए केंद्र सरकार को इन्हें उनके देश वापस भेजना चाहिए। जम्मू पहले से ही सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, ऐसे में आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को शरण देना सही नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है।
- शिवसेना जम्मू-कश्मीर के प्रधान मनीष साहनी
मौजूदा केन्द्रीय सरकार रोहिंग्या, बांग्लादेशियों को वापस भेजने को लेकर बीते 11 वर्षों से कोई निर्णय नहीं ले पाई है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ठीक से अपना पक्ष तक नहीं रख पाई है। केन्द्रीय सरकार प्रदेश सरकार के साथ बैठ कर जम्मू कश्मीर से इन विदेशी नागरिकों को देश के किसी अन्य हिस्से में ले जाने के लिए क्यों कदम नहीं उठा रही। जम्मू कश्मीर आतंक ग्रस्त प्रदेश है, जो जहां से इन्हें किसी दूसरे राज्य में क्यों नहीं ले जाया जा रहा। यह फैसला तो केन्द्र सरकार ने करना है। अंतर राष्ट्रीय कानून है कि किसी देश के नागरिकों में अपने ही देश में हिंसा हो रही हो तो उन्हें पड़ोसी देश शरण दे। इसी के तहत रोहिंग्या व बांग्लादेश के नागरिक भारत में रह रहे है। केन्द्र सरकार लेकिन देशवासियों को इस मुद्दे को गुमराह कर रही है। उसकी करनी और कथनी में अंतर है।
- प्रदेश कांग्रेंस प्रवक्ता : रविंदर शर्मा
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