search

यमुनानगर: सरकारी स्कूलों में कम हुए 10 हजार से ज्यादा छात्र, एक्शन में आया शिक्षा विभाग; चार चरणों में कराएगा सर्वे

LHC0088 2026-1-6 12:57:03 views 703
  

सरकारी स्कूलों में कम हुए 10 हजार से ज्यादा छात्र



जागरण संवाददाता, यमुनानगर। यमुनानगर सरकारी स्कूलों में एक साल के अंदर 10 हजार 683 छात्र कम हो गए हैं। इनमें कितने ड्रॉप आउट (पढ़ाई छोड़ चुके) और कितने प्राइवेट स्कूलों पढ़ रहे हैं, शिक्षा विभाग के सर्वे में यह स्पष्ट हो जाएगा।

दरअसल, ड्रॉप आउट को कम करने के लिए शिक्षा विभाग ने चार चरण में सर्वे शुरू किया है। यह सर्वे 19 जनवरी तक चलेगा। इसमें ड्रॉप आउट विद्यार्थियों को चिन्हित कर उन्हें स्कूल में लाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास होंगे।
कुल चार चरणों में होगा सर्वे

पहले चरण के स्कूल स्तरीय सर्वे में शिक्षक, शिक्षा स्वयंसेवक, स्काउट गाइड, एनएसएस, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि जुटे हैं। यह लोग अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्र, प्रवासी परिवारों, सड़क पर रहने वाले बच्चों, अनाथ, बेघर, घुमंतु समुदाय व ईंट-भट्टों तक पहुंच रहे हैं। यहां 7 से 14 व 16 से 19 आयु वर्ग के ड्रॉप आउट विद्यार्थियों को चिन्हित किया जाएगा। यह सर्वे रिपोर्ट शिक्षकों को नौ जनवरी तक तैयार कर क्लस्टर हेड को भेजनी है।

इसके बाद दूसरे चरण के क्लस्टर स्तर के सर्वे में 12-13 जनवरी को क्लस्टर हेड स्कूलों से आई रिपोर्ट को इकट्ठा कर बीईओ व बीआरसी को भेजेंगे। तीसरे चरण के खंड स्तर सर्वे में14-15 जनवरी बीईओ व बीआरसी डेटा इकट्ठा कर डीपीसी को भेजेंगे और चौथे चरण में जिला स्तर सर्वे में 16-19 जनवरी को डीपीसी सभी खंडों का डेटा मुख्यालय को भेजेंगे।
दो साल में 20,635 छात्र कम

जानकारी के मुताबिक, जिले के राजकीय स्कूलों से दो साल में 20,635 विद्यार्थी कम हुए हैं। 2022 में विद्यार्थियों की कुल संख्या 1,07,386 थी। 2023 में यह घटकर 1,07,212 हो गई। 2024 में 97,200 और 2025 में 86,517 विद्यार्थी रह गए। इन ड्रॉप आउट विद्यार्थियों में पढ़ाई छोड़ने वाले और निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले कितने है, यह भी विभाग के सर्वे में सामने आ जाएगा।
शिक्षकों की कमी सर्वे में बाधा

शीतकालीन अवकाश में सर्वे के तहत शिक्षक स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों का पता लगा रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी सर्वे में बड़ी बाधा बन रही है। जिले के एक दर्जन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और दो दर्जन स्कूलों में एक शिक्षक हैं। इन स्कूलों में क्लस्टर स्तर पर अस्थायी शिक्षक भेजे जाते हैं। अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी है। ऐसे में सर्वे का लक्ष्य पूरा होगा या नहीं, ये सवाल उठ रहे हैं।
ड्रॉप आउट बढ़ने की वजह

राजकीय स्कूलों में ड्रॉप आउट बढ़ने की वजह सामाजिक, आर्थिक व पारिवारिक हो सकती हैं। स्कूलों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी भी एक कारण मानी जा रही है। करीब 600 शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहीं स्कूलों में डुअल डेस्क, भवन व अन्य संसाधनों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।
6-7 साल के बच्चों का होगा दाखिला

जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता ने बताया कि सर्वे में ड्रॉप आउट विद्यार्थियों को चिन्हित कर उन्हें स्कूलों में लाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। इनमें छह से सात साल के बच्चों का पास के राजकीय प्राथमिक स्कूल में दाखिला कराया जाएगा। अन्य विद्यार्थियों की सूची तैयार कर पढ़ाई छोड़ने के कारणों की समीक्षा की जाएगी। पूरा प्रयास रहेगा कि सभी चरणों में सर्वे गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा कर लिया जाए। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
165760