search

चुपके-चुपके आंखों की रोशनी छीन सकता है ग्लूकोमा, डॉक्टर ने बताया किन्हें रहना चाहिए ज्यादा सावधान

cy520520 5 day(s) ago views 382
  

ग्लूकोमा छीन सकता है आंखों की रोशनी (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ग्लूकोमा, जिसे आम भाषा में \“काला मोतिया\“ कहा जाता है, आंखों की एक गंभीर स्थिति है जो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। इसे अक्सर साइलेंट थीफ कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके कोई साफ लक्षण (Glaucoma Symptoms) नहीं दिखाई देते।  

इसलिए अगर समय पर इसका पता न चले, तो यह स्थायी अंधापन का कारण बन सकता है। इसलिए इस बारे में लोगों को जानकार बनाने के लिए हर साल जनवरी को Glaucoma Awareness Month की तरह मनाया जाता है। इसलिए हमने डॉ. पवन गुप्ता (सीनियर कैटेरेक्ट एंड रेटिना सर्जन, आई 7 हॉस्पिटल लाजपत नगर एंड विजन आई क्लीनिक नई दिल्ली) से ग्लूकोमा के लक्षण और रिस्क फैक्टर्स के बारे में जानने की कोशिश की। आइए जानें उन्होंने क्या बताया।
ग्लूकोमा के लक्षण कैसे होते हैं?

ग्लूकोमा की सबसे खतरनाक बात यह है कि ज्यादातर मरीजों को तब तक पता नहीं चलता जब तक कि उनकी दृष्टि काफी हद तक कम न हो जाए। इसके लक्षणों को स्टेज के अनुसार समझा जा सकता है-
शुरुआती और मीडियम स्टेज

  • कोई लक्षण नहीं- शुरुआत में आंखों में न तो दर्द होता है और न ही दृष्टि में कोई अचानक बदलाव आता है।
  • पेरिफेरल विजन का कम होना- इसमें सबसे पहले पेरिफेरल विजन यानी साइड का दिखना कम होने लगता है। मरीज को सामने की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन अगल-बगल का हिस्सा धुंधला या काला दिखाई देने लगता है।
  • कंट्रास्ट में कमी- रंगों और परछाइयों के बीच अंतर कर पाना मुश्किल होने लगता है।
  • अंधेरा महसूस होना- मरीज को ऐसा लग सकता है कि उनके आसपास रोशनी कम हो गई है।
    (Picture Courtesy: Freepik)
एक्यूट स्टेज

जब आंखों का दबाव बहुत तेजी से बढ़ता है, तो ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं-

  • आंखों में तेज दर्द और रेडनेस।
  • सिर में तेज दर्द और जी मिचलाना।
  • रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुष जैसे घेरे (Haloes) दिखाई देना।
  • दृष्टि का अचानक धुंधला हो जाना।

एडवांस्ड स्टेज

  • अगर इलाज न मिले, तो टनल विजन (सिर्फ सामने का थोड़ा सा हिस्सा दिखना) की स्थिति बन जाती है और फिर आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है।

ग्लूकोमा के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

हालांकि, ग्लूकोमा किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।  

  • पारिवारिक इतिहास- अगर आपके परिवार में किसी को ग्लूकोमा है, तो आपको इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • उम्र- 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है।
  • आंखों की बीमारियां- हाई मायोपिया वाले लोगों को इसका खतरा रहता है।
  • मेडिकल कंडीशन- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित जांच करानी चाहिए।
  • स्टेरॉयड का इस्तेमाल- लंबे समय तक स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स या दवाओं के इस्तेमाल से आंखों का दबाव बढ़ा सकता है।
  • चोट या सर्जरी- आंखों में पुरानी चोट या आंखों की बार-बार हुई सर्जरी भी ग्लूकोमा का कारण बन सकती है।

बचाव के लिए क्या करें?

  • ग्लूकोमा से होने वाला नुकसान ठीक नहीं किए जा सकते, यानी जो दृष्टि चली गई उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए, जल्दी पहचान ही एकमात्र बचाव है।
  • 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार आंखों के डॉक्टर से \“प्रेशर चेक\“ और \“फंडस जांच\“ जरूर करवाएं।


यह भी पढ़ें- धुंधली होती नजर के हो सकते हैं कई कारण, जानें इसकी वजह और कब लें डॉक्टर की सलाह

यह भी पढ़ें- क्या आप भी हो जाते हैं ग्लूकोमा और मोतियाबिंद में कंफ्यूज, तो जानें इनमें अंतर
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
145835

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com