3253 लोग साइबर फ्रॉड के बने शिकार।
निरंकार जायसवाल, बाराबंकी। साइबर अपराध लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। नित नए झांसे और हथकंडों का प्रयोग करने वाले साइबर अपराधियों का लोगों में अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर दहशत है। प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि पूरे वर्ष में 52 हजार 976 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड सामने आए। देश के टाप फाइव में उत्तर प्रदेश का चौथा स्थान है।
नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के अनुसार अकेले बाराबंकी जिले में वर्ष 2025 में 3253 लोग साइबर फ्राड के शिकार बन चुके हैं। पीड़ितों ने अपने 10 करोड़ 30 लाख रुपये गंवाए हैं।
समय से मिली सूचना देने वालों को साइबर सेल ने एक करोड़ 20 लाख रुपये साइबर अपराधियों के शिकंजे से वापस दिलाई गई है। साथ ही करीब ढाई करोड़ रुपये अलग-अलग बैंकों में होल्ड भी करा रखा है, जिनकी वापसी के लिए न्यायालय में प्रक्रिया चल रही है।
यूपी चौथे स्थान पर
सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्राड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के अनुसार वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के कुल दो लाख 75 हजार 264 लोगों से साइबर फ्राड किए गए हैं। पीड़ितों की दर्ज शिकायतों में कुल 1443 करोड़ रुपये धानराशि के फ्राड सामने आए हैं।
जागरूक बन रहें सतर्क
साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता और जागरूकता सबसे प्रमुख हथियार है। किसी भी अनजान लिंक, मैसेज पर क्लिक न करें, इंटरनेट बैंकिंग अथवा इ-मेल आइडी व अन्य प्लेटफॉर्म पर बनाया जाने वाला पासवर्ड थोड़ा जटिल, मजबूत व अलग बनाएं।
सॉफ्टवेयर अपडेट रखें और सार्वजनिक वाई-फाई से बचें, किसी को भी ओटीपी न बताएं, एपीके फाइल न खोले और किसी भी धोखे में न फंसे। बावजूद यदि आप किसी साइबर फ्राड का शिकार होते हैं तो तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करें। आपके रुपये होल्ड कराए जा सकते।
क्या है सीएफसीएफआरएमएस
नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली नागरिकों को वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करने का एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसे गृह मंत्रालय ने लांच किया है, ताकि सूचना मिलते ही धोखाधड़ी वाले रुपयों को रोका जा सके।
साइबर ठगों पर लगातार काम किया जा रहा है और कई प्रांतों में साइबर ठगी करने वाले कई साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इसको रोकने का सबसे प्रभावी हथियार इसके प्रति जागरूकता और फ्राड होने की दशा में कहां सूचना दर्ज करानी चाहिए इसकी जानकारी होनी चाहिए। -अर्पित विजयवर्गीय, पुलिस अधीक्षक बाराबंकी। |
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