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नोएडा में अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस को चकमा दे रहे थे जुड़वा भाई; सरगना समेत चार गिरफ्तार

cy520520 2026-1-6 00:56:07 views 490
  

सेक्टर 14 ए कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में जानकारी देते डीसीपी यमुना प्रसाद, पीछे खड़े फेज-1 थाना पुलिस की गिरफ्त में आरोपित। सौ. मीडिया सेल



जागरण संवाददाता, नोएडा। अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का फेज वन थाना पुलिस ने सोमवार को पर्दाफाश किया। सरगना समेत चार बदमाशों को सेक्टर 14ए से दबोचा। आरोपितों में जुड़वा हमशक्ल दो भाई भी हैं। पुलिस को चकमा देने के लिए एक जैसे कपड़े पहनकर एक भाई मैकेनिक की दुकान पर होता, जबकि दूसरा भाई उसी समय चोरी कर रहा होता।
दो साल में चुराए 350 से ज्यादा वाहन

आरोपितों के पास से करीब 15 लाख रुपए कीमत के चोरी के 15 वाहन, अन्य वाहनों के 28 पार्ट्स बरामद हुए। गिरोह अनडिमांड चोरी कर वाहन व पार्ट्स खपाने का काम कर रहे थे। चोरी के सामान को खपाने के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़े। चारों पर 33 मुकदमे दर्ज हैं। चारों मिलकर दो साल में 350 से ज्यादा वाहन चोरी कर चुके हैं।

नोएडा में लगातार हो रही वाहन चोरी को लेकर एडीसीपी शैव्या गोयल व एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम लगी हैं। टीम ने वाहन चोरी करने वाले चार संदिग्ध को सोमवार को सेक्टर 14ए से दबोचा। डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि आरोपितों की पहचान दिल्ली जैतपुर सौरभ विहार के शदाब उर्फ रूतबा, अरमान उर्फ सुट्टा, उलमान व फरीदाबाद बल्लभगढ़ के ऊंचागांव के विजय के रूप में हुई।
कितना पढ़े-लिखे हैं आरोपी?

गिरोह का सरगना शदाब उर्फ रूतबा है, जबकि अरमान व उलमान सगे भाई और विजय कबाड़ी है। अरमान आईटीआई किया हुआ है, जबकि अन्य ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। आरोपित एनसीआर में सेक्टर, सोसायटी, कॉलोनी व फैक्ट्री के आसपास खड़े वाहनों की लाक तोड़कर चोरी करते हैं।

अन्य राज्यों को वाहनों को 10-15 हजार रुपए में बेच देते हैं या फिर पार्ट्स में काटकर कबाड़ी विजय के माध्यम से खपाते हैं। इससे प्राप्त रकम को आपस में बांटकर खर्चे व शौक पूरे करते हैं। पुलिस ने बरामद बाइक व पार्ट्स के आधार पर नौ वाहनों के मालिक पता लगा लिया है। अन्य वाहनों की जानकारी कर रही है। शदाब पर नौ, अरमान, उलमान व विजय पर आठ-आठ मुकदमे दर्ज हैं।
जुड़वा भाई देते थे पुलिस को चकमा

एडीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि अरमान और उलमान दोनों भाई पुलिस को गुमराह करने का काम कर रहे थे। जब एक भाई रेकी या चोरी करने जाता तो दूसरा भाई दुकान पर एक जैसे कपड़े पहनकर सीसीटीवी के दायरे में रहता। पुलिस के पूछताछ करने पर सीसीटीवी फुटेज दिखाकर बच सकें। कोई सामने से देखने पर भी नहीं पहचान सकता है कि कौन अरमान और उलमान है।
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