संवाद सूत्र, टाटीझरिया(हजारीबाग)। थाना क्षेत्र के अमनारी से लापता हुई तीनों नाबालिग लड़कियां रविवार देर रात घर वापस आ गईं । तीनों ने हजारीबाग के दीपगढ़ा स्थित रोजबड स्कूल में शरण ले रखी थीं,जहां से इन्हें रविवार रात वापस लाया गया।
इन लड़कियों को कुछ घरेलू काम दिए गए थे। नहीं करने पर गुस्से में मां और लड़कियों की नानी ने इन्हें डांट -फटकार की। अब ये तीनों विचार कर घर से झरपो गई और वहां से हजारीबाग चली गईं।
वहां पहुंचने के बाद तीनों बस स्टैंड के किसी होटल में काम खोजने लगीं। वहां इन तीनों ने बताया कि उनके माता -पिता नहीं हैं वे अनाथ हैं,इसलिए काम की तलाश में हैं। होटलवाले ने उन्हें दीपूगढ़ा स्थित स्कूल भेज दिया।
उनकी दास्तां सुन रोजबड स्कूल की संचालिका ने दी थी शरण
वहां रोजबड स्कूल की संचालिका ने इनके द्वारा बताए गई मनगढ़ंत बातों को सुनकर इन्हें शरण दी। उन्होंने इन नाबालिक बच्चियों का आधारकार्ड वगैरह मंगवाने की सलाह दी। चूंकि शाम हो गया था,इसलिए उन्हें स्कूल में ही रखा।
इस बीच दो लड़कियों को घर की याद सताने लगी। वह रोने लगी। स्कूल संचालिका ने इन्हें एक सौ रुपये देकर सवारी पकड़ लेने की सलाह दी। दोनों बच्चियां सवारी से टाटीझरिया पहुंचीं।
रस्ते में इन्हें रोहित और सोनू मिले,जो अमनारी के ही हैं। उन्होंने मुखिया प्रतिनिधि उपेंद्र पांडेय और महेश अग्रवाल को इसकी जानकारी दी।
फिर थाना प्रभारी और जनप्रतिनिधि ने मिलकर दीपगढ़ा स्कूल पहुंचकर वहां सो रही तीसरी नाबालिग को भी सकुशल रात 12 बजे थाना लाया। फिर इन बच्चियों को घरवालों को सुपुर्द कर दिया गया।
स्वजनों ने लगाया था बहला-फुसलाकर भगाने का आरोप
परिजनों ने इस संबंध में टाटीझरिया थाना में आवेदन देकर आशंका जताई है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने तीनों नाबालिगों को बहला-फुसलाकर भगा लिया है। परिजनों के अनुसार, किसी बात को लेकर घर में डांट-फटकार हुई थी, जिसके बाद तीनों बच्चियां 3 जनवरी को सुबह करीब 10 बजे घर से निकलीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं।
इसके बाद परिजनों ने आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों के यहां काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। काफी प्रयास के बाद भी बच्चियों का पता नहीं चलने पर परिजनों ने थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई है। |