डॉक्टरों की हड़ताल। (जागरण)
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। डॉक्टरों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए सोमवार से ओपीडी सेवा बंद की अवधि एक घंटे से बढ़ाकर दो घंटे कर दी है।
इसके चलते राजधानी भुवनेश्वर समेत पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ओएमएसए के निर्णय के अनुसार सोमवार को राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में सुबह 9 बजे से 11 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। हालांकि, मेडिकल कॉलेजों को इस ओपीडी बंद के दायरे से बाहर रखा गया है। बावजूद इसके, जिला और उपजिला अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को खासा संकट झेलना पड़ा।
सरकार द्वारा डॉक्टरों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिए जाने से नाराज ओएमएसए ने यह कड़ा कदम उठाया है। ओएमएसए अध्यक्ष ने कहा है कि हम मरीजों को परेशान करना नहीं चाहते हैं, हम अपना कार्य कर रहे हैं, सरकार को भी हमारी मांग पर विचार करना चाहिए।
15 से अधिक डॉक्टरी पदवी है, परन्तु 6 हजार डॉक्टर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले भी स्वास्थ्य मंत्री के साथ हमारी चर्चा हुई है, मगर कोई लाभ नहीं हुआ है। ऐसे में अब हम इस मामले में खुद मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं।
वहीं, स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिग ने कहा है कि ओएमएसए की मांग को सरकार गम्भीरता से ले रही है। एक कमेटी भी बनाए हैं, पहली बैठक हो गई है। उनकी दो मांग में से एक मांग पर प्रक्रिया चल रही है। मेरे साथ भी तीन-चार बार बात कर चुकी है।
डॉक्टरों से अनुरोध है कि अपने महत्वपूर्ण दायित्व को समझते हुए ओपीडी सेवा को बंद ना करें। गौरतलब है कि पदोन्नति, वेतन वृद्धि, कार्यस्थल पर सुरक्षा समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर ओएमएसए बीते 26 तारीख से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
इस दौरान रोजाना पूर्वाह्न 10 से 11 बजे तक एक घंटे की ओपीडी सेवा बंद रखी जा रही थी। लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण ओएमएसए की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में ओपीडी बंद की अवधि बढ़ाने का फैसला लिया गया।
डॉक्टरों के इस आंदोलन को कनिष्ठ डॉक्टर संघ का भी समर्थन मिल गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन के तेज होते स्वरूप को देखते हुए आम जनता की चिंता बढ़ गई है और स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर साफ नजर आने लगा है। |