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कब मनाया जाएगा सकट चौथ का व्रत, क्या है इसकी मान्यता? ज्योतिषाचार्य की विधि से करें पूजा, संभल में उत्साह

LHC0088 2026-1-5 08:26:30 views 1255
  

सांकेतिक तस्वीर।



संवाद सहयोगी, जागरण, संभल। ज्योतिषाचार्य पंडित शोभित शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में सकट चौथ को तिलवा चौथ, तिल-कुटा चौथ, माघी चौथ और वक्र-तुंडि चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। संभल समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। धार्मिक मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत रखने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
छह जनवरी को रखा जाएगा व्रत

पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि छह जनवरी की सुबह 8:01 बजे प्रारंभ होकर सात जनवरी की सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार छह जनवरी को ही सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस दिन चंद्र देव का उदय रात 8:59 बजे होगा, जिसके बाद महिलाएं चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण करेंगी। सकट चौथ को ‘तिल-कुटा’ चौथ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है।
पूजा में तिल का महत्व

पूजा में तिल से बना भोग अर्पित किया जाता है। महिलाएं पूजा स्थल पर तिल का पहाड़ बनाती हैं, जिसे जीवन की बाधाओं का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान चांदी के सिक्के से इस तिल-पहाड़ को बीच से काटकर संतान की मंगलकामना की जाती है।

पंडित शोभित शास्त्री बताते हैं कि सकट चौथ का व्रत सकट माता के साथ भगवान गणेश की विशेष कृपा दिलाता है। गणपति विघ्नहर्ता हैं, जो सभी संकटों को दूर कर परिवार में सुख-सौभाग्य प्रदान करते हैं। वहीं चंद्र देव के दर्शन से मानसिक शांति मिलती है और मन के कष्ट दूर होते हैं।
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