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जहरीली गैस से तीन की माैत पर धनबाद जिला प्रशासन गंभीर नहीं, एक महीने से रिपोर्ट लिए बैठी है जांच कमेटी

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केंदुआडीह में जहरीली गैस का रिसाव और परेशान लोग। (फाइल फोटो)



रविशंकर सिंह, जागरण, धनबाद। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की केंदुआडीह कोलियरी के आस-पास जहरीली गैस रिसाव से अब तक तीन मौतें हो चुकी हैं। सैकड़ों लोग अलग अलग अस्पतालों में इलाज भी कराने पहुंचे।

दमघोंटू कार्बन मोनोक्साइड के खतरे को देखते हुए धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने चार दिसंबर 2025 को ही मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति गठित की थी। अपर समाहर्ता विनोद कुमार के नेतृत्व में गठित जांच समिति में जिला खनन अधिकारी रितेश तिग्गा, आपदा अधिकारी संजय झा समेत दो अन्य लोग शामिल हैं।

कमेटी को घटना के कारणों, लापरवाही और प्रभावितों को राहत देने के उपायों पर रिपोर्ट देनी थी। जांच टीम को तीन दिनों के भीतर ही मामले की रिपोर्ट देनी थी। रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई हाेनी थी। लेकिन जांच टीम के गठित होने व हादसे के महीने भर बाद भी जांच रिपोर्ट अब तक उपायुक्त को नहीं मिल सकी है।

हद तो यह है कि उपायुक्त के स्तर से भी इस मामले में जांच टीम के अफसरों से पूछताछ तक नहीं की गई। ऐसे में मनमाने ढंग से काम कर रहे जांच कमेटी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस बाबत पूछे जाने पर उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि जल्द ही कमेटी के अफसरों से पूछताछ कर रिपोर्ट मांगी जाएगी। कमेटी से रिपोर्ट देने में देरी को लेकर भी जवाब मांगेंगे।
प्रशासनिक लापरवाही का नमूना, जिम्मेवारों को है बचाना

पड़ताल में सामने आया कि जांच टीम के सदस्यों ने कमेटी गठन के बाद प्रभावित इलाके में एक दिन प्रभावितों से बातचीत भी की थी। बातचीत के दौरान अफसरों ने केंदुआडीह के कुछ लोगों से बाद में भी बात करने व उनसे जानकारी लेने की बात कही थी। लेकिन जिस घर में महिला की मौत हुई, उसके आसपास के लोगों से एक बार पूछताछ करने के बाद दोबारा जांच कमेटी ने न तो कोई जानकारी ली न ही पूछताछ की।

केंदुआडीह के प्रभावित लोग इस मामले में प्रशासन और प्रशासनिक कार्यप्राणाली से खफा हैं। केंदुआडीह राजपूत बस्ती के शैलेश सिंह, जमीला और आलम अंसारी समेत अन्य प्रभावितों का कहना है कि डीसी के निर्देश के बाद भी अब तक रिपोर्ट जमा व सार्वजनिक नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही है। प्रभावितों का कहना है कि प्रशासनिक तंत्र मामले के दोषी अफसरों को बचाने में लगा।
डीसी के निर्देश के अनुरूप जांच भी नहीं हुई

उपायुक्त आदित्य रंजन ने केंदुआडीह इलाके की परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए घटना की वस्तुस्थिति ज्ञात करने, उत्तरदायित्य निर्धारण करने तथा भविष्य हेतु सुधारात्मक उपाय सुझाने के निमित्त जांच समिति बनाई थी।

डीसी ने जांच टीम काे निर्देश दिया था कि क्रमवार सभी घटना की जांच हो और पता लगाया जाए कि किसकी लापरवाही से लोगों की जान गई है। जांच के उपरांत जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई होनी थी। लेकिन जांच टीम ने न तो घटना की क्रमवार जांच की न ही सुधार के उपाय सुझाए।
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