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गाजियाबाद में ड्रग तस्करों के खिलाफ अभियान होगा तेज, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर भी प्लान तैयार

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आलोक प्रियदर्शी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त। जागरण



विनीत कुमार, गाजियाबाद। सड़कों पर हर साल बढ़ते वाहनों के बीच पुलिसिंग की चुनौतियां और भी जटिल होने वाली हैं। जहां एक तरफ सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक दबाव दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाता है, वहीं दूसरी तरफ मादक पदार्थों की तस्करी युवा आबादी और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा बन रही है।

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट वर्ष 2026 में सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण को नई धार देने की तैयारी में है। पुलिस का फोकस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तकनीकी विस्तार, ड्रग तस्करी पर कार्रवाई और अवैध हथियारों की आपूर्ति और बिक्री पर सख्त कार्रवाई करने पर रहेगा। इसी कड़ी में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था एवं ट्रैफिक आलोक प्रियदर्शी से जागरण संवाददाता विनीत कुमार ने बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...
सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। बीते वर्ष सड़क हादसों में करीब 400 लोगों की जान गई है। ऐसे हादसे दोबारा न हों इसके लिए क्या प्रयास है?

सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने 2026 में कई ठोस कदम उठाए हैं ताकि जानलेवा हादसे रोके जा सकें। सबसे पहले मुख्य मार्गों पर शून्य मृत्यु गलियारा (जीरो फेटेलिटी कारीडोर) योजना लागू की जा रही है। इनमें मेरठ रोड पर मोदीनगर का क्षेत्र, एनएच-नौ को शामिल किया गया है।

इन स्थानों पर क्रिटिकल रेस्पांस टीम बनाई गई हैं। टीम में एक दारोगा और चार सिपाही शामिल किए गए हैं। इस टीम को सीपीआर की प्रक्रिया बताई गई है। स्पीड गन और नशे में वाहन चलाने वालों की जांच के लिए उपकरण दिए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य हादसा जनित जोखिम को पहले स्तर पर पहचानकर उसे रोकना है।
गाजियाबाद में जाम और ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। 2026 में इसे नियंत्रित करने के लिए आपकी प्राथमिक रणनीति क्या होगी?

गाजियाबाद में हर साल वाहन संख्या और रोड नेटवर्क पर दबाव दोनों बढ़ रहे हैं। जाम से लड़ाई अब सिर्फ मैनपावर से नहीं जीती जा सकती। इसमें स्मार्ट ट्रैफिक इंजीनियरिंग, एआइ सक्षम निगरानी और नागरिक सहयोग को एक साथ जोड़ना जरूरी है। 2026 में हमारी पहली प्राथमिकता आइटीएमएस कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग और डेटा एनालिटिक्स आधारित चालान प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय करना है।

इसी महीने से आइटीएमएस कैमरों की लाइव फीड मिलनी शुरू हो जाएगी। वह केवल चालान के लिए नहीं, बल्कि ट्रैफिक पैटर्न समझने का भी आधार बनेगी। इससे हम यह पहचान सकेंगे कि किस चौराहे पर किस समय किस तरह का प्रेशर बनता है। उसी हिसाब से सिग्नल टाइमिंग, लेन डायवर्जन, और बैरिकेडिंग प्लान को रियल-टाइम में बदला जा सकेगा।

इसके अलावा 500 ट्रैफिक मित्रों की तैनाती इस साल फील्ड लेवल ट्रैफिक मैनेजमेंट को मानवीय स्पर्श देगी। ट्रैफिक मित्र भीड़ वाले इलाकों में पुलिस की आंख और कान बनकर काम करेंगे। ट्रैफिक मित्रों का काम सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल नहीं, बल्कि नियमों को लेकर व्यवहार परिवर्तन लाना भी है।
चालान और प्रतिबंध के बाद भी लोग ओवरस्पीडिंग, रील बनाने और स्टंट से नहीं रुकते। पुलिस इस दिशा में क्या काम कर रही है?

सख्ती जरूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं। चालान और सड़क पर सख्ती अपराध या उल्लंघन की दिशा में काम आते हैं, लेकिन आदत तब तक नहीं बदलती जब तक नागरिक खुद इसके जोखिम को समझकर अपनी भागीदारी न दें। 2026 में हम प्रवर्तन के साथ-साथ व्यवहार आधारित यातायात जागरूकता अभियान भी चलाएंगे। जिसमें स्कूल, कालेज, आरडब्ल्यूए और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान जारी रखेंगे।

सड़क पर रील या स्टंट रोकने के लिए भी हम स्थानीय युवा समूहों के बीच ट्रैफिक मित्रों को संवाद के रूप में स्थापित कर रहे हैं। 2026 में हम रोड उल्लंघन के हाटस्पाट की पहचान करेंगे। यानी 2026 में पुलिसिंग सिर्फ दंडात्मक नहीं बल्कि व्यवहारिक होगी। यह बदलाव नागरिकों के भरोसे को भी बढ़ाता है क्योंकि लोग देखना चाहते हैं कि पुलिस समाधान भी दे सिर्फ कार्रवाई नहीं।
ड्रग्स तस्करी पर रोक के लिए पुलिस क्या कदम उठा रही है। ड्रग्स पर सख्त कार्रवाई के लिए पुलिस को अलग से तैयारी करने की जरूरत है क्या?

पुलिस ड्रग्स तस्करी पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई इस साल करेगी। पुराने अनुभवों से सामने आया है कि कई चोरी नशे के लिए की गईं। इसलिए नशे पर करारी चोट की जाएगी। 2026 में हमारा फोकस ड्रग तस्करों के नेटवर्क को खत्म करने पर होगा।

हम ड्रग तस्करों की पहचान के लिए नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराए गए लोगों से बातचीत कर जानकारी जुटा रहे हैं। जिससे पता चल सके कि उन्हें आपूर्ति कहां से हुई। ऐसे ही सारी जानकारी जुटाकर पुलिस अन्य संसाधनों से भी जानकारी एकत्र करेगी और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा लोकल पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए बीट सिस्टम, क्राइम प्रिवेंशन पेट्रोलिंग और इंटेलिजेंस शेयरिंग मॉडल पर भी काम होगा।
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