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जम्मू में कितने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक? प्रशासन के पास सटीक डाटा नहीं, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

cy520520 5 day(s) ago views 712
  

जम्मू में कितने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक? (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू में अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय बन गई है। इनकी पहचान और वास्तविक संख्या को लेकर प्रशासन के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है, जिससे सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन के पास सटीक डाटा नहीं

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जम्मू में चोरी-छिपे रह रहे रोहिंग्या नागरिकों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है, लेकिन प्रशासन के पास इसका कोई सटीक डाटा ही नहीं है। बताया जाता है कि कई रोहिंग्या नागरिक संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से जुड़े पहचान पत्र दिखाकर शहर के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर इन पहचान पत्रों की वैधता और कानूनी स्थिति को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव है, जिससे पहचान प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। प्रशासनिक अमले के भीतर भी इस बात को लेकर असमंजस है कि ऐसे पहचान पत्र भारतीय कानून के तहत किस हद तक मान्य हैं।
जम्मू में कहां हैं रोहिंग्या नागरिक?

  • सुंजवां क्षेत्र (सैन्य छावनी के नजदीक)
  • नरवाल (जम्मू रेलवे स्टेशन के नजदीक)
  • एयरपोर्ट के पास
  • आरएसपुरा रोड क्षेत्र में
  • रेलवे लाइन के किनारे
  • तवी किनारे अस्थायी बस्तियों में
  • औद्योगिक क्षेत्रों के पास श्रमिक कॉलोनियों में
  • सांबा के कई इलाकों में

जम्मू में बढ़े रोहिंग्या और बांग्लादेशी

वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने संसद में जम्मू-कश्मीर में रह रहे रोहिंग्या नागरिकों की संख्या से जुड़े सरकारी आंकड़े जारी किए थे। उस समय यह संख्या सीमित बताई गई थी, लेकिन बीते सात वर्षों में परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं।

अधिकारियों का मानना है कि इस अवधि में इनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई हो सकती है। खासकर जम्मू शहर के कई संवेदनशील इलाकों में ये लोग श्रमिकों के रूप में काम कर रहे हैं और धीरे-धीरे स्थायी बस्तियों का रूप ले चुके हैं।
शरणार्थी का दर्जा देने का कानूनी आधार नहीं

भाजपा प्रवक्ता एवं वरिष्ठ वकील अंकुर शर्मा ने कहा कि रोहिंग्या और बांग्लादेश के नागरिक जो भारत में रह रहे हैं, उन्हें किसी भी स्थिति में शरणार्थी (रिफ्यूजी) नहीं माना जा सकता। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के रिफ्यूजी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए इन विदेशी नागरिकों को शरणार्थी का दर्जा देने का कानूनी आधार नहीं है।

विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इन विदेशी नागरिकों की मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर और बढ़ता हुआ खतरा बन चुकी है। ये लोग वर्षों से यहां रहकर स्थानीय आबादी में घुल-मिल गए हैं और इसी का लाभ उठाकर भारतीय नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं में अवैध रूप से हिस्सेदारी कर रहे हैं।
रोहिंग्या नागरिकों पर आपराधिक मामले : BJP

अंकुर शर्मा ने आरोप लगाया कि ये विदेशी नागरिक जिहादी ताकतों के लिए ‘चारे’ का काम करते हैं और धर्म के नाम पर आतंकवाद फैलाने में अप्रत्यक्ष रूप से मददगार बनते हैं। जम्मू क्षेत्र में रह रहे ऐसे कई विदेशी नागरिक चोरी, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध सरकारी दस्तावेज तैयार कराने जैसे आपराधिक मामलों में संलिप्त पाए गए हैं।

जब सत्ता में कश्मीर-केंद्रित राजनीतिक दल आते हैं, तो वे धार्मिक आधार पर इन लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उनके लिए अवैध सरकारी दस्तावेज बनवाने का काम करते हैं।
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