साइबर धोखाधड़ी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीयों ने पिछले छह वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के कारण 52,976 करोड़ रुपये से अधिक गंवाए हैं। महाराष्ट्र साइबर अपराधों से सर्वाधिक प्रभावित रहा। भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आइ4सी) के डाटा के अनुसार, केवल 2025 में ही लगभग 19,813 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और धोखाधड़ी से संबंधित 2,177,524 शिकायतें दर्ज की गईं।
2024 में 22,849.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और धोखाधड़ी से संबंधित 1,918,852 शिकायतें दर्ज की गई थीं। पिछले वर्षों की तुलना में यह काफी अधिक है। ये बढ़ते मामले डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे वित्तीय अपराधों में चिंताजनक वृद्धि की ओर इशारा करते हैं।
सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के डाटा के अनुसार, 2025 में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में से 45 प्रतिशत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों - कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से संबंधित थीं। पिछले साल साइबर ठगी से हुए नुकसान में से 77 प्रतिशत निवेश योजनाओं के नाम पर किया गया।
आठ प्रतिशत डिजिटल गिरफ्तारी के जरिये, सात प्रतिशत क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के जरिए, चार प्रतिशत सेक्सटार्शन में, तीन प्रतिशत ई-कामर्स धोखाधड़ी में और एक प्रतिशत एप/मैलवेयर आधारित धोखाधड़ी में गंवाना पड़ा। विभिन्न श्रेणियों के साइबर अपराधों से संबंधित शिकायतें दर्ज करने के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल लांच किया गया है।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर, 1930 आनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को तात्कालिक सहायता प्रदान करता है।
पिछले साल साइबर धोखाधड़ी से प्रभावित राज्य
- राज्य - शिकायतें - नुकसान रुपये में
- महाराष्ट्र - 2,833,20 - 3,203 करोड़
- कर्नाटक - 2,132,28 - 2,413 करोड़
- तमिलनाडु - 1,232,90 - 1,897 करोड़
- उत्तर प्रदेश - 2,752,64 - 1,443 करोड़
- तेलंगाना - 95,000 - 1,372 करोड़
(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ) |