नए चेहरों पर लड़ा जाएगा पंजाब 2027 का चुनाव। फाइल फोटो
इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। वैसे अभी से यह कहना काफी जल्दबाजी होगी कि 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव नए चेहरों को लेकर ही लड़ा जाएगा। लेकिन जिस प्रकार से सभी पार्टियों ने अभी से अपनी रणनीतियों की घोषणा करनी शुरू कर दी है वह इस बात के संकेत जरूर दे रही हैं कि चुनाव जल्द से जल्द करवाए जाएं।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के दोफाड़ होने के बाद सुखबीर बादल हर हलके में नए चेहरों को तलाश रहे हैं। असल में पार्टी के पुराने चेहरे अकाली दल पुनर्सुरजीत में चले गए हैं। सुखबीर बादल को इन सभी के हलकों में नए चेहरों की तलाश होगी।
हाल ही में जब पंजाब में कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी तो उन जिलों में सुखबीर बादल ने अपने पुराने चेहरों के छोड़कर जाने के चलते नए चेहरों को ही मैदान में लोगों की मदद के लिए उतारा था।
यही नहीं, उन्होंने उन्हें स्थापित करने के लिए पूरा जोर भी लगाया, लेकिन अकाली दल की दिक्कत यह है कि अगर वह 2022 के चुनाव की तरह दोफाड़ होकर लड़ा तो वोट बैंक का बंटना निश्चित है जो अकाली दल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
इसी तरह कांग्रेस ने भी 2027 के चुनाव को साख का सवाल बनाया हुआ है। हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में मिली हार के बाद पार्टी वर्कर हतोत्साहित हैं। पार्टी प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने हाल ही में कहा है कि वह 70 सीटें यूथ को देना चाहते हैं।
उनके इस बयान को लेकर पार्टी में असमंजस की स्थिति है खासतौर पर पुराने नेताओं में...। जिन नेताओं ने अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी पारी खेलनी है वह हर हाल में टिकट की दौड़ में रहेंगे और ऐसा न होने पर अपने बेटों को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं।
आम आदमी पार्टी (आप) ने भी संकेत दिया है कि मौजूदा विधायकों और हलका प्रभारियों की जगह 46 नए चेहरों को उतारेंगे। पार्टी अपने चार दर्जन के करीब विधायकों की कारगुजारी से खुश नहीं है। खासतौर पर महिला विधायकों ने पार्टी लीडरशिप को निराश किया है। उनकी जगह नए चेहरे लाए जाएंगे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास अपने स्तर पर चुनाव लड़ने का मौका है। वह भी उन सीटों पर नए चेहरों को ही लाएगी जहां पार्टी ने कभी भी चुनाव नहीं लड़ा। हालांकि 2022 के चुनाव में भी पार्टी अपने स्तर पर ही लड़ी थी लेकिन तब तीन कृषि कानूनों के कारण उनका काफी विरोध हुआ था। |
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