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एटा में कड़ाके की ठंड का कहर जारी, दो की मौत; अस्पतालों में बीमारों की भीड़ बढ़ी

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अस्पताल में उमड़ी भीड़।



जागरण संवाददाता, एटा। कड़ाके की ठंड अब सीधे तौर पर जनजीवन और सेहत पर भारी पड़ने लगी है। शुक्रवार को ठंड से तबियत बिगड़ने पर एक युवक और बदायूं की एक वृद्धा की मौत हो गई। दोनों मामलों में ठंड के कारण स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने की बात सामने आई है।
सर्दी-जुकाम से बिगड़ी तबियत, 32 वर्षीय युवक ने इलाज से पहले तोड़ा दम

थाना अवागढ़ क्षेत्र के गांव नावली निवासी प्रमोद कुमार (32 वर्ष) को दो दिन से सर्दी-जुकाम की शिकायत थी। स्वजन के अनुसार स्थानीय स्तर पर इलाज चल रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह अचानक तबियत बिगड़ गई। स्थानीय चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताई, जिसके बाद स्वजन उन्हें इलाज के लिए आगरा ले गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रमोद ने दम तोड़ दिया। स्वजन ठंड के कारण हृदयघात की आशंका जता रहे हैं। बताया गया कि प्रमोद को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, जिससे परिवार अचानक हुई मौत से सदमे में है।
ठंड से गिरा ऑक्सीजन स्तर, सैफई ले जाते समय बदायूं की वृद्धा की मौत


वहीं बदायूं नगर के मुहल्ला नगरान निवासी जकारा सुल्तान (70 वर्ष) की भी ठंड के चलते मौत हो गई। मृतिका के भतीजे मुहम्मद शहबाज ने बताया कि वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं और बदायूं मेडिकल कालेज में भर्ती थीं। आक्सीजन स्तर लगातार गिरने पर गुरुवार शाम उन्हें सैफई रेफर किया गया। इलाज के लिए ले जाते समय एटा में हालत और बिगड़ गई। वीरांगना अवंतीबाई स्वशासी मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में रात साढ़े आठ बजे पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने भी ठंड के कारण आक्सीजन स्तर कम होने की पुष्टि की है।
ठंड ने बच्चों की बढ़ाई मुश्किलें, ओपीडी से वार्ड तक मरीजों की भीड़


बढ़ती ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी से लेकर बाल रोग विभाग के वार्ड तक बीमार बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सर्दी के कारण बच्चे निमोनिया, सीने में जकड़न, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। फिलहाल पीडियाट्रिक वार्ड में 25 बच्चे भर्ती हैं, जबकि एसएनसीयू में भी नवजात और गंभीर बच्चों का इलाज जारी है।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह के अनुसार ठंड में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। विशेषकर नवजात और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है। तापमान गिरने से श्वसन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ठिठुरन बरकरार, तापमान स्थिर रहने से बढ़ी परेशानी


मौसम का मिजाज लगातार सख्त बना हुआ है। शुक्रवार को दिन भर ठंडी हवाओं ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। सुबह कोहरा हल्का रहा, जिससे आवागमन में राहत मिली, लेकिन बादलों की वजह से धूप नहीं निकली। जिले में न्यूनतम तापमान आठ और अधिकतम 19 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान में कोई खास बदलाव न होने से ठंड का असर लगातार बना हुआ है। सुबह-शाम ठिठुरन ज्यादा बढ़ गई है। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोग अलाव और हीटर का सहारा लेने को मजबूर हैं।

मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार सिंह के अनुसार अगले कुछ दिनों तक ठंड से राहत की संभावना कम है। ऐसे में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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