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उत्तराखंड में आवारा कुत्तों से बचाव को बनी एसओपी, 24 घंटे होगा निगरानी का इंतजाम

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तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। आवारा कुत्तों के आतंक व निराश्रित गोवंश से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शहरी विकास विभाग ने मानक परिचालन कार्यविधि (एसओपी) लागू कर दी है। एसओपी में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जिम्मेदारियों को स्पष्ट कर एक मजबूत व तकनीक आधारित तंत्र विकसित करने की व्यवस्था की गई है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे तथा भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित पशुओं की आवाजाही रोककर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जाए।

एसओपी के अनुसार शहरी क्षेत्रों में शहरी विकास विभाग और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस वे पर निराश्रित पशुओं की निगरानी के लिए विशेष गश्ती दलों की स्थापना की जाएगी। आम नागरिकों की त्वरित सूचना के लिए 24 घंटे का हेल्पलाइन सिस्टम सक्रिय रहेगा। जब तक नया पोर्टल और मोबाइल ऐप पूरी तरह विकसित नहीं हो जाता, तब तक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 को ही आधिकारिक हेल्पलाइन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

एसओपी में तय किया गया है कि शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से निराश्रित श्वान और गोवंश को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा। इन स्थानों पर निराश्रित पशुओं का चिह्नांकन कर उन्हें नजदीकी शेल्टर होम या गोसदनों में सुरक्षित स्थानांतरित किया जाएगा।

इसके साथ ही अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन, एंटीबाडी इम्युनोग्लोब्यूलिन और पशु हमले से जुड़ी घटनाओं के इलाज की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। चिकित्सकीय स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और एक समर्पित चिकित्सा तंत्र विकसित किया जाएगा।

प्रमुख सचिव-सचिव होंगे राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष
एसओपी के तहत निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष प्रमुख सचिव/सचिव शहरी विकास होंगे। यह समिति हर छह माह में अनिवार्य बैठक करेगी और कार्य प्रगति की रिपोर्ट सीधे मुख्य सचिव को भेजी जाएगी।

समिति संसाधनों के आवंटन के साथ-साथ पूरे तंत्र की समग्र निगरानी करेगी। जिला स्तर पर भी जिला स्तरीय कमेटी गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे। इस कमेटी में सीएमओ, नगर आयुक्त, शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग, विकास विभाग और खेल विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति जिले में एसओपी के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।

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हाइवे के उस प्रत्येक खंड की मैपिंग होगी, जहां दिखते श्वान
हाइवे सुरक्षा को लेकर एसओपी में विशेष प्रविधान किए गए हैं। हाइवे के उस प्रत्येक खंड की मैपिंग की जाएगी, जहां निराश्रित गोवंश या श्वान नियमित रूप से दिखाई देते हैं। प्रत्येक चिह्नित खंड के लिए कम से कम एक जेई या उससे वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। निराश्रित पशु दिखने पर नोडल अधिकारी जियो-टैग फोटो के साथ तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को सूचना देगा।

सूचना मिलते ही नियंत्रण कक्ष उपलब्ध पशु पकड़ दल या गश्ती दल को सक्रिय करेगा और सटीक लोकेशन तक पहुंचने में सहयोग करेगा। जनपद स्तर पर क्षेत्रीय पशु पकड़ दलों का गठन किया जाएगा। देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी और नैनीताल जैसे अधिक प्रभावित जिलों में प्रति जनपद दो बड़े और दो छोटे पिक-अप वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि अन्य जिलों में एक बड़ा और एक छोटा पिक-अप वाहन तैनात किया जाएगा।

डिजिटल ऐप बताएगा आश्रय स्थलों का लाइव डेटा
एक डिजिटल ऐप भी विकसित करने की व्यवस्था की गई है। इसमें सभी आश्रय स्थलों का लाइव डेटा उपलब्ध रहेगा। पशुओं को केवल उन्हीं आश्रय स्थलों में ले जाया जाएगा, जहां क्षमता, भोजन और देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था होगी। इसके अलावा देहरादून, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल में 100-100 श्वानों की क्षमता वाले दो-दो डॉग शेल्टर होम स्थापित किए जाएंगे। एबीसी केंद्रों को इन शेल्टर होम्स से मैप किया जाएगा ताकि उपचार और पुनर्वास में कोई बाधा न आए।
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