गोला-बारूद के 90 प्रतिशत स्वदेशीकरण से सेना की युद्ध क्षमता को मिली मजबूती (फाइल फोटो)
पीटीआई, नई दिल्ली। सेना अपनी हथियार प्रणालियों में गोला-बारूद और सटीक गोला-बारूद के लगभग 200 वेरिएंट का इस्तेमाल करती है। केंद्रित नीति सुधारों और उद्योग के साथ जुड़ाव के जरिये इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक का स्वदेशीकरण कर लिया गया है और उन्हें घरेलू स्त्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है। इससे सेना की लंबी अवधि की युद्ध क्षमता मजबूत हुई है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गोला-बारूद, अतिरिक्त कलपुर्जें और लाजिस्टिक्स युद्ध शक्ति की रीढ़ हैं। इसके मद्देनजर भारतीय सेना ने गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता को अपनी तैयारी की रणनीति के मूल में रखा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने से लेकर एक लचीली घरेलू आपूर्ति श्रृंखला बनाने तक, स्वदेशीकरण के लिए सेना के लगातार प्रयास गोला-बारूद की तैयारी और लंबी अवधि की युद्ध क्षमता को नया आकार दे रहे हैं।
पिछले चार-पांच वर्षों में खरीद प्रक्रियाओं को प्रतिस्पर्धा और कई विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए पुनर्गठित किया गया है। \“मेक इन इंडिया\“ पहल के तहत लगभग 16,000 करोड़ रुपये का आर्डर बास्केट बनाया गया है, जबकि पिछले तीन वर्षों में स्वदेशी निर्माताओं को लगभग 26,000 करोड़ रुपये के गोला-बारूद आपूर्ति आर्डर दिए गए हैं।
अब गोला-बारूद के कई वेरिएंट कई घरेलू स्त्रोतों से मिल सकते हैं। अधिकारी ने कहा, \“\“हाल के संघर्षों ने एक सच्चाई सामने लाई है कि जो देश घरेलू स्तर पर गोला-बारूद की आपूर्ति बनाए रख सकते हैं, वे आपरेशनल मोमेंटम बनाए रखने की बेहतर स्थिति में हैं।\“\“ |