पूर्व आईपीएस अधिकारी को कड़ी सुरक्षा में वज्र वाहन से न्यायालय में लाया गया था।
विधि संवाददाता, देवरिया। धोखाधड़ी कर औद्योगिक प्लाट आवंटन के मामले में जेल में निरुद्ध पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जमानत प्रार्थना पत्र पर शुक्रवार को सुनवाई एक बार फिर टल गई। पूर्व आईपीएस अधिकारी को कड़ी सुरक्षा में वज्र वाहन से न्यायालय में लाया गया था।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की कोर्ट ने आरोपित के अधिवक्ता के अनुरोध पर विवेचक को शनिवार को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से केस डायरी के साथ न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है, जबकि विवेचक की ओर से केस डायरी विशेष वाहक के माध्यम से न्यायालय में भेजा गया था।
अभियोजन के अनुसार, वर्ष 1998 में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहते हुए अमिताभ ठाकुर ने कथित रूप से अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम में हेराफेरी कर औद्योगिक प्लाट का आवंटन करा लिया था। इस संबंध में लखनऊ निवासी संजय शर्मा ने सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने विवेचना एसआईटी को स्थानांतरित कर दी।
एसआईटी के विवेचक सोबरन सिंह ने 10 दिसंबर 2025 को आरोपित अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने आरोपित को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। तभी से अमिताभ ठाकुर जेल में निरुद्ध हैं।
शुक्रवार को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आरोपित ने यह भी बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग से की है। उन्होंने अनुरोध किया कि विवेचक को संपूर्ण केस डायरी के साथ तलब करने के बाद ही जमानत पर सुनवाई की जाए।
आरोप लगाया कि पुलिस मामले में लीपापोती कर रही है और अब तक कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में विवेचक से यह स्पष्ट कराया जाए कि किन परिस्थितियों में बिना साक्ष्य के गिरफ्तारी की गई।
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