जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने नगर निगम (MCD) के जूनियर इंजीनियर (जेई) और दो अन्य को सीबीआई की ओर से दर्ज वर्ष 2024 के रिश्वतखोरी मामले में दोषी करार दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने सुरेंद्र कुमार शर्मा, सुरेंद्र कुमार जांगर और रमेश चंद जैन को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात व भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया।
अदालत ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे यह साबित होता है कि सुरेंद्र शर्मा और जांगर ने रिश्वत की मांग की थी और सुरेंद्र शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। अदालत ने कहा कि बरामदगी, केमिकल टेस्ट और स्वतंत्र गवाहों के बयान अभियोजन पक्ष के मामले को पुष्ट करते हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कोर्ट ने यह भी माना कि पूरा अपराध एमसीडी जेई रमेश चंद जैन की मिलीभगत से अंजाम दिया गया और तीनों के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान विश्वसनीय, स्पष्ट और तकनीकी व इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों से समर्थित हैं। अदालत ने सजा तय करने के लिए मामला पांच जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
रमेश चंद जैन एमसीडी में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था, जबकि जांगर पूर्व हेल्पर था। सुरेंद्र कुमार शर्मा निजी व्यक्ति होने के बावजूद जैन की मिलीभगत से खुद को एमसीडी अधिकारी बताता था।
अभियोजन के अनुसार 18 मार्च 2024 को सुरेंद्र कुमार शर्मा ने शिकायतकर्ता अरुण कुमार गुप्ता से घर निर्माण की अनुमति के एवज में रिश्वत की मांग की और रकम न देने पर मकान गिराने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने रिश्वत न देने का फैसला करते हुए सीबीआई से संपर्क किया।
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