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रूपनगर शहर में की वार्डबंदी के खिलाफ जाएंगे हाईकोर्ट जाने की तैयारी, जनसंख्या के आधार पर ना होने के लगे आरोप

LHC0088 2026-1-2 16:57:12 views 680
  

आजाद पार्षद अमरिंदर सिंह रीहल बावा।  



जागरण संवाददाता, रूपनगर। रूपनगर नगर परिषद की नई वार्डबंदी को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। वार्ड नंबर चार से आजाद पार्षद अमरिंदर सिंह रीहल बावा ने वार्डबंदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी की घोषणा की है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

उनका कहना है कि मौजूदा वार्डबंदी न तो जनसंख्या के वास्तविक आंकड़ों पर आधारित है और न ही यह पारदर्शी तरीके से तैयार की गई है। रीहल बावा ने कहा कि नई वार्डबंदी में रूपनगर शहर के विभिन्न वार्डों में रहने वाले बाशिंदों की संख्या वर्ष 2011 की जनगणना से भी कम दर्शाई गई है, जबकि बीते 13 वर्षों में शहर का आबादी क्षेत्र लगातार बढ़ा है।  

उन्होंने सवाल उठाया कि जब रूपनगर की कुल आबादी 70 से 80 हजार के बीच पहुंच चुकी है, तो फिर वार्डों में जनसंख्या कम कैसे दिखाई जा सकती है। जनगणना के यही आंकड़े वार्डबंदी के लिए सरकार को भेजे जाते हैं, ऐसे में आंकड़ों में कमी गंभीर संदेह पैदा करती है।

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गलत जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर वार्डबंदी के आरोप

उन्होंने आशंका जताई कि गलत जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर की गई वार्डबंदी से बड़ी संख्या में मतदाता आबादी में शामिल ही नहीं हो पाएंगे। इससे कई नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित रह सकते हैं। रीहल बावा ने सवाल उठाया कि यदि ऐसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

अमरिंदर सिंह रीहल बावा ने यह भी आरोप लगाया कि वार्डबंदी में कई स्थानों पर वार्डों की सीमाएं स्पष्ट नहीं की गई हैं।  

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आम जनता को होगी परेशानी

कई इलाकों में रिक्त स्थान छोड़े गए हैं और यह नहीं बताया गया कि कौन सा क्षेत्र किस वार्ड में शामिल है। उनके अनुसार वार्डबंदी को स्पष्ट और सरल बनाने के बजाय इसे एक पहेली जैसा बना दिया गया है, जिससे आम जनता के साथ-साथ प्रशासन को भी परेशानी हो सकती है।
रीहल बावा ने कहा कि यदि वार्डबंदी सही तरीके से नहीं की गई, तो न तो निष्पक्ष और सुचारू चुनाव संभव होंगे और न ही भविष्य में नगर परिषद शहर के सुनियोजित विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।  

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