search

एशिया की सबसे ऊंची जोजिला टनल लद्दाख के लिए नई उम्मीद, मई तक ब्रेकथ्रू होने की संभावना, जानिए क्या होगा फायदा

Chikheang Half hour(s) ago views 793
  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2027 तक लद्दाख आकर इस प्रोजेक्ट को देश को समर्पित कर सकते हैं। फाइल फोटो।



विवेक सिंह, जम्मू। पूरा साल तक सड़क मार्ग से लद्दाख को देश से जोड़ने के लिए बन रही एशिया की सबसे उंची जोजि ला टनल लद्दाखियों के लिए नई उम्मीदें लाएगी। इस वर्ष मई महीने तक कश्मीर व द्रास की ओर से टनल की खुदाई का काम खत्म होते ही इस टनल को यातायात के लिए खोलने की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जोजि ला में इस समय भारी बर्फबारी के बीच 11, 578 फुट की उंचाई पर 13.150 किलोमीटर लंबी इस टनल के निमार्ण का कार्य जोरशोर से जारी है। करीब 6800 करोड़ रूपये की लागत वाली इस टनल को मेघा इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा बनाया जा रहा है।

कश्मीर के बालटाल व कारगिल के मीनामर्ग की ओर से टनल निर्माण कार्य में लगे श्रमिक व इंजीनियर इस समय देश की सबसे चुनौतीपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास की इस परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अत्यधिक ठंड, भारी बर्फबारी व हिमस्खलन के खतरों का सामना कर रहे हैं।
लगभग 12 किलोमीटर सुरंग की खुदाई हो गई है

मई महीने तक दोनों ओर से खोदी जा रही टनल का ब्रेकथ्रू होना लगभग तय है। लगभग 12 किलोमीटर सुरंग की खुदाई हो गई है व इस समय पीछे बची एक किलोमीटर सुरंग की खुदाई करने के लिए दोनो ओर काम हो रहा है। ब्रेकथ्रू के बाद टनल को यातायात लायक बनाने के लिए अभियान चलेगा।

कश्मीर के बालटाल व कारगिल के मीनामर्ग की ओर से टनल निर्माण कार्य में लगे श्रमिक व इंजीनियर इस समय देश की सबसे चुनौतीपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास की इस परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अत्यधिक ठंड, भारी बर्फबारी व हिमस्खलन के खतरों का सामना कर रहे हैं।

सीमा सड़क संगठन के हिमवीर तय समय में टनल को तैयार करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। सब कुछ सामान्य रहने की स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2027 तक लद्दाख आकर इस प्रोजेक्ट को देश को समर्पित कर सकते हैं।
लगातार हो रही बर्फ़बारी ने दुर्गम भू-भाग को ढक लिया

प्रोजेक्ट के निमार्ण में जुटे एक इंजीनियर का कहना है कि लगातार हो रही बर्फ़बारी ने दुर्गम भू-भाग को ढक लिया है। इन अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बीच हमारी टीम हर तरह की चुनौती से निपट रही है। ज़ोजिला सुरंग परियोजना केवल एक इंजीनियरिंग चमत्कार नहीं है, अपितु यह संकल्प व दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है जो भारत के लद्दाख जैसे कठिन इलाकों में हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगी।

उन्हाेंने बताया कि 13.25 किलोमीटर लंबाई में से 12 किलोमीटर सुरंग की खुदाई हो चुकी है। अब पीछे बची लगभग एक किलोमीटर टनल की खुदाई हो रही है। टनल निमार्ण के लिए सर्वोत्तम तकनीकी पद्धतियों को इस्तेमाल किया जा रहा है। परियोजना में सभी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू किया गया है। इनमें जटिल भूविज्ञान, जल रिसाव की समस्याओं व सुरंग ढहने के जोखिमों से प्रभावी तरीके से निपटा गया है।
हर लद्दाखी का सपना है कि जोजि ला टनल जल्द पूरा हो

कारगिल के निवासी सज्जाद कारगिली का कहना है कि हर लद्दाखी का सपना है कि जोजि ला टनल जल्द पूरा हो। इससे लद्दाख में सड़क यात्रा का नया अध्याय शुरू होगा। सर्दियों के महीनों में जोजि पास में भारी बर्फबारी में यात्रा जोखिम भरी होती है। अत्याधिक बर्फबारी से जोजि ला पास बंद होने से लद्दाख में जीवन की रफ्तार कम हो जाती है। इंजीनियरिंग के इसे बेजोड़ नमूने के बनने से कश्मीर की ओर से कारगिल तक पहुंचना आसान होने से पर्यटकों की आमद में बहुत वृद्धि होगी।  
जोजि ला लाएगा लद्दाख में विकास का नया सवेरा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता का कहना है कि जोजि ला क्षेत्र में विकास का नया सवेरा लाएगा। एशिया की सबसे उंची यह टनल विकास को गति देने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता व मजबूत इराधों की प्रतीक होगी। पूरा होने पर यह टनल लद्दाखियों को मोदी सरकार का एक बड़ा तोहफा होगी। इसे देखने के लिए लद्दाख की भीड़ उमड़ना तय है। टनल बनने के बाद हर भारतीय का सपना होगा कि वह इससे होकर लद्दाख तक पहुंचे।

केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण ही बुनियादी ढांचे के विकास का यह महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट तेजी से पूरा होने की ओर बढ़ रहा है। इस टनल के बनने से लद्दाख पूरा साल सड़क मार्ग से देश के साथ जुड़ा रहेगा। इससे क्षेत्र में विकास, पर्यटन के साथ सीमाओं की रक्षा कर रही सेना की रणनीतिक तैयारियों को भी बल मिलेगा। हमारी पूरी कोशिश है कि इस टनल के निमार्ण का काम पूरी तेजी के साथ चलता रहे। लद्दाख प्रशासन इस टनल के जल्द निमार्ण के लिए पूरा सहयोग दे रहा है।  
चुनौती भरा है जोजि ला टनल का निमार्ण

लगभग बारह हजार फुट की उंचाई पर जोजि ला टनल का निमार्ण चुनौतियों से भरा है। कश्मीर के सोनमर्ग से द्रास के मीनामर्ग तक 52 ऐसे स्थान है यहां पर सर्दियों के महीनों में भारी हिमस्खलन होता है। विशाल जोजि ला पास पर हर साल लगभग 5-6 मीटर तक बर्फ जमती है। जनवरी के महीने में इस इलाके में तापमान कभी-कभी शून्य से 28 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर जाता है।

कश्मीर के सोनमर्ग पर्यटन स्थल से जोजि ला पास, गुमरी तक 30 किलोमीटर में 10 किलोमीटर का मार्ग खड़ी पहाड़ियों के कारण बेहद कठिन है। वहां पर सर्दियों में हिमस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे कठिन हालात में जोजि ला इलाके में काम कर रहे इंजीनियरों ने कठिन मौसम की चुनौतियों का सामना करते हुए सर्दियों के महीनों में टनल निमार्ण की गति को बनाए रखा है।
परियोजना में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बचे 5 हजार करोड़

जोजि ला टनल के निमार्ण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने से देश के पांच हजार करोड़ रूपये की बचत हुई है। टनल के साथ अठारह किमी का अप्रोच रोड़ भी है । पांचवे बार टेंडर निकाला था तो सरकार ने इसकी कीमत 12 हजार करोड़ तय की थी। एक साल तक इस टनल के निमार्ण के लिए नई तकनीकों पर गौर करने के बाद यह प्रोजेक्ट 6800 करोड़ में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था।

टनल के निमार्ण में आस्ट्रियन टनलिंग मेथड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है। नई तकीनीकों के इस्तेमाल से टनल निमार्ण की लागत में पांच हजार करोड़ रूपये की बचत हुई है। टनल के निमार्ण को 17 अक्टूबर, 2013 में मंजूरी मिली थी। कैबिनेट कमेटी की मंजूरी के बाद पहली बार केवल एक ही एजेंसी आगे आई, जिसके कारण प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी। दूसरी व तीसरी बार भी ऐसा ही हुआ व सरकार को प्रक्रिया रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं 2015 में चौथी बार निविदाएं आमंत्रित करने के बाद आगे आए एकमात्र बोलीदाता को टेंडर देने पर पक्षपात व भ्रष्टाचार के आरोप लगे व इसे रद्द कर दिया गया।
7.57 मीटर उंची व घोड़े की नाल के आकार वाली है यह सुरंग

यह सुरंग 7.57 मीटर उंची व घोड़े की नाल के आकार वाली है। एक नली वाली टनल में दो लेन हैं। यह टनल मध्य कश्मीर के गांदरबल व लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास कस्बे के बीच हिमालय में जोजि ला दर्रे के नीचे से गुजर रही है। यह टनल पूरा साल पाकिस्तान व चीन की सीमा से लगे लद्दाख में भारी सैन्य साजो-सामान की आवाजाही को सुगम बनाएगी।

टनल के रखरखाव के लिए 1.5 मीटर चौड़ा एक अलग पैदल मार्ग बनेगा। हर 750 मीटर के बाद, 40 मीटर लंबा एक चौड़ा खंड बनाया गया है ताकि आपात स्थिति में वाहनों को वहां खड़ा किया जाए। हिमपात से बचाव के लिए सुरंग में छह किलोमीटर की दूरी तक व्यापक हिम सुरक्षा अवसंरचना, कैच डैम, एयर ब्लास्ट, सुरक्षा दीवारें व डिफ्लेक्टर डैम होंगे।

पूरा हो जाने पर, जोजि ला टनल कश्मीर व लेह के बीच यात्रा समय को लगभग साढ़े तीन घंटे कम कर देगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार, स्थानीय समुदायों को लाभव संवेदनशील सीमांत इलाकों में सेना की रणनीति तैयारियों को बल मिलेगा।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
145878

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com