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क्यों छोटे चूहे पर सवारी करते हैं बप्पा? जानिए क्यों गणपति ने चुना मूषक को अपना वाहन

cy520520 2025-12-31 22:24:52 views 1254
  

गणेश जी की सवारी कैसे बना मूषक? (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। विशालकाय शरीर, गज जैसा मुख और लंबी सूंड वाले भगवान गणेश जब एक नन्हे से चूहे (मूषक) पर सवारी करते हैं, तो यह दृश्य मन में जिज्ञासा पैदा करता है। दुनिया के सबसे भारी देवता ने आखिर एक छोटे से जीव को ही अपना वाहन क्यों चुना? इसके पीछे केवल पौराणिक कथाएं ही नहीं, बल्कि गहरे जीवन प्रबंधन के सूत्र और आध्यात्मिक संदेश भी छिपे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
पौराणिक कथा: जब \“गजमुखासुर\“ का अहंकार टूटा

गणेश पुराण के अनुसार, द्वापर युग में गजमुखासुर नाम का एक पराक्रमी असुर था। उसने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। जिसके बाद उसने वरदान पा लिया कि उसे कोई भी अस्त्र-शस्त्र नहीं मार पाएगा। वरदान मिलते ही वह देवताओं को प्रताड़ित करने लगा।

अंत में भगवान गणेश ने उसे युद्ध के लिए ललकारा। जब गणेश जी ने उस पर प्रहार किया, तो गजमुखासुर ने बचने के लिए खुद को एक विशाल मूषक (चूहे) में बदल लिया। बप्पा ने छलांग लगाकर उस चूहे पर सवारी कर ली। उनका भार पड़ते ही असुर का अहंकार टूट गया और उसने झट से क्षमा मांग ली। तब से वह चूहा गणेश जी का स्थायी वाहन बन गया।

  

(Image Source: AI-Generated)
आध्यात्मिक संदेश: मन पर नियंत्रण का प्रतीक

गणेश जी \“बुद्धि\“ के देवता हैं और मूषक “चंचलता“ का प्रतीक है। चूहा स्वभाव से चीजों को चीजों को कुतर देता है और एक जगह टिकता नहीं है। हमारा \“मन\“ भी बिल्कुल चूहे जैसा ही है- चंचल, स्वार्थी और हर वक्त अतृप्त रहने वाला।

बुद्धि की श्रेष्ठता: गणेश जी का मूषक पर बैठना यह दर्शाता है कि एक बुद्धिमान व्यक्ति वही है जिसने अपने चंचल मन और इच्छाओं को वश में कर लिया हो।

कुतर्क पर लगाम: चूहा अंधकार में रहकर तर्क-वितर्क और कुतरने का काम करता है। गणेश जी उस पर सवार होकर यह संदेश देते हैं कि ज्ञान के द्वारा व्यर्थ के कुतर्कों को दबाना जरूरी है।
छोटा या बड़ा, सबका है महत्व

गणेश जी की यह सवारी एक बड़ा सामाजिक संदेश भी देती है। विशाल शरीर वाले गणेश जी ने सबसे छोटे जीव को अपना साथी बनाया। यह सिखाता है कि सृष्टि में कोई भी छोटा या तुच्छ नहीं है। एक कुशल नेतृत्व वही है जो सबसे छोटे और कमजोर को भी अपने साथ लेकर चले।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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